वाराणसी

संतान की आस में कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे काशी, लोलार्क कुंड में लगाई आस्था की डुबकी, 3 किमी लगी लाइन

Varanasi latest news: काशी के लोलार्क कुंड में स्नान के लिए लोगों की लंबी कतार लगी हुई है। देश के अलग-अलग राज्यों से लोग यहां संतान प्राप्ति के लिए डुबकी लगाने पहुंचते हैं....
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Sep 17, 2026
Varanasi latest news
स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालु, (Pc-Vijendra Mishra)

Lolark Kund in Kashi: लोलार्क षष्ठी पर गोद भरने की आस में कई राज्यों से श्रद्धालु काशी पहुंचे हुए हैं। भदैनी इलाके में स्थित लोलार्क कुंड में स्नान के लिए दंपति अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। हर साल संतान और पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए देश के कोने-कोने से दंपति यहां पहुंचते हैं। देर रात से ही स्नान का सिलसिला शुरू हो चुका है और अब तक एक लाख से अधिक दंपति कुंड में स्नान कर चुके है। ज्योतिष के मुताबिक, गुरुवार की सुबह 6:31 से 10:26 तक स्नान करने का शुभ मुहूर्त है। ऐसे में श्रद्धालु रात 12 से ही अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान मुख्य सड़क पर करीब 3 किलोमीटर की लंबी लाइन भी लगी हुई है।

ड्रोन कैमरों से निगरानी

लोलार्क कुंड में स्नान करने के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत 10 राज्यों से दंपति पहुंचे हुए हैं। कुछ लोगों ने स्नान कर लिया है, जबकि कुछ लोग अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। श्रद्धालुओं के हुजूम को देखते हुए भदैनी से शिवाला इलाके तक 3 किलोमीटर की बैरिकेडिंग की गई है। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस भारी संख्या में तैनात की गई है। लोग बैरिकेडिंग के भीतर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, ताकि शुभ मुहूर्त में डुबकी लगा सकें। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है और सादे लिबास में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

मंदिर के मुख्य पुजारी रमेश कुमार पांडे के मुताबिक, संतान की प्राप्ति के लिए दंपति दूर दराज से यहां पहुंचते हैं और कुंड में एक साथ तीन डुबकी लगाते हैं। उन्होंने बताया कि यदि दंपति को संतान की प्राप्ति हो जाती है, तो अपनी इच्छा के मुताबिक दंपति इस कुंड में एक फल को समर्पित कर देते हैं। इसके साथ ही वह यहां अपने भीगे हुए कपड़े भी छोड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि इससे उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और ग्रहों की बढ़ा भी उन्हें परेशान नहीं करती। श्रद्धालु स्नान के बाद लोलाकेश्वर महादेव की पूजा करते हैं और संतान की प्राप्ति के लिए ईश्वर से आशीर्वाद मांगते हैं।

सूर्य उपासना का केंद्र

उन्होंने बताया कि धार्मिक दृष्टि से इस कुंड का अधिक महत्व है। इसे सूर्य की उपासना का एक केंद्र माना जाता है, जहां सौर्य ऊर्जा और मां गंगा का अद्भुत संगम होता है। इस कुंड का ढांचा गुप्त काल का बताया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, दसवीं शताब्दी में गढ़वाल नरेश गोविंद चंद्र और इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इसके जीर्णोद्धार पर सुंदरीकरण में अपना योगदान दिया था। वर्तमान में पर्यटन विभाग इसके सुंदरीकरण की देखरेख करता है। इस कुंड की गहराई करीब 50 फिट है और यह 15 फीट चौड़ा है। जलाशय में नीचे उतरते ही यह उल्टे पिरामिड आकार का दिखाई पड़ता है, जहां तीन दिशाओं से उतारने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं।

Updated on:
17 Sept 2026 08:02 am
Published on:
17 Sept 2026 08:02 am