
वाराणसी. भारत व पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। पुलवामा में आतंकी हमले के बाद जैश कि बालकोट स्थित ठिकाने पर हुए एयर स्ट्राइक के बाद से स्थिति बदल चुकी है। लोगों का ध्यान एक तरफ भारत व पाकिस्तान के बीच के तनाव पर है तो दूसरी तरफ सोमवार को लोगों ने महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर महादेव का दर्शन करने में जुटे हुए हैं। देश भर में भगवान शिव के अनेक मंदिर है जिनकी अपनी कहानी है। इन्हीं मंदिरों में एक पाकिस्तानी महादेव भी है, जिसकी कहानी बेहद दिलचस्प व अनोखी है।
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शिव की नगरी काशी के कण-कण में महादेव विरजमान रहते हैं। बनारस में ही पाकिस्तानी महादेव का मंदिर है। शीतला घाट पर स्थित पाकिस्तानी महादेव की कहानी बेहद अनोखी है। गंगा नदी के किनारे स्थित शीतला घाट पर बने पाकिस्तानी महादेव में लोग गंगा में स्नान के बाद दर्शन करते हैं। महाशिवरात्रि के अतिरिक्त सावन में भी भक्त दर्शन करके मनचाही मुराद पूरी करते हैं। पाकिस्तानी महादेव की कहानी बेहद दिलचस्प है। भारत व पाकिस्तान में बंटवारे के समय दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरी जगह पर गये थे। लाहौर से दो हीरा व्यापारी जमुना दास व निहाल चंद्र काशी आये थे। कहा जाता है कि दोनों ही व्यापारी जब पाकिस्तान से बनारस आ रहे थे तो अपने साथ वहां से खास शिवलिंग लेकर आये थे। दोनों ही व्यापारियों की इच्छा थी कि इस शिवलिंग को बनारस में जाकर गंगा में प्रवाहित कर देंगे। बनारस आने के बाद शिवलिंग को गंगा में प्रभावित करने की जगह शीतला घाट पर ही स्थापित कर दिया गया। पाकिस्तान से शिवलिंग लाने के कारण मंदिर का नाम पाकिस्तानी महादेव पड़ गया। इसके बाद से मंदिर को पाकिस्तानी महादेव के ही नाम से जाना जाता है जहां पर दर्शन करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
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