वाराणसी

मायावती के बड़े दांव से बैकफुट पर अखिलेश यादव, उठाना होगा बड़ा नुकसान

पूर्वांचल की जीती सीट पर भी लगेगा झटका, आसान नहीं होगा सपा के असंतुष्टों को मनाना
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Updated: 28 May 2018, 4:46 PM IST
Akhilesh Yadav and Mayawati
Akhilesh Yadav and Mayawati

वाराणसी. बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ा दांव खेल दिया है जिसके बाद से पूर्व सीएम अखिलेश यादव बैकफुट पर आ चुके हैं। अखिलेश यादव की पार्टी सपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सपा में असंतुष्टों की संख्या में बढ़ोतरी होगी और इसका खामियाजा भी पार्टी को ही भुगतना पड़ सकता है। बसपा प्रमुख की बात से साफ हो चुका है कि यूपी में उनकी पार्टी सपा से अधिक सक्षम है जो भविष्य की रणनीति तय करने वाली हो सकती है।
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बसपा सुप्रमो मायावती ने कहा है कि यदि गठबंधन में उन्हें सही संख्या में सीट नहीं मिली तो वह अकेले ही चुनाव लडऩे को तैयार है। मायावती के बयान आने के बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि बसपा सुप्रीमो की बात से साफ हो जाता है कि यूपी में सपा के साथ गठबंधन होगा। सपा व बसपा किसी भी हाल में एक-दूसरे से गठबंधन करना चाहते हैं लेकिन बड़ा सवाल है कि दोनों ही गठबंधन में बड़ा दल कौन होगा। मायावती के बयान से साफ हो जाता है कि उनकी पार्टी को सबसे अधिक सीट चाहिए। ऐसा होने पर बसपा की ताकत सपा से अधिक हो जायेगी। यह अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। सपा को अपने खेमे की सीट भी बसपा को देनी पड़ सकती है जिसके चलते सपा से जुड़े लोगों की नाराजगी भी बढ़ सकती है और इसका खामियाजा भी सपा को ही उठाना पड़ेगा।
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पूर्वांचल पर है सपा व बसपा की नजर
पूर्वांचल की एक दर्जन से अधिक सीट पर सपा व बसपा दोनों की नजर है। बसपा के पास एक भी सीट नहीं है तो सपा के पास गोरखपुर, फूलपुर व आजमगढ़ सीट है जो अब बसपा के खाते में भी जा सकती है। मायावती के बयान को गठबंधन के लिए तगड़ा झटका भी माना जा सकता है। एक तरफ सभी दल पीएम नरेन्द्र मोदी को रोकने के लिए महागठबंधन की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ गठबंधन होने से पहले ही अधिक सीट लेने पर अपना दावा करने के लिए बड़े बयान जारी हो रहे हैं। इसे समय की मांग कहा जाये या फिर चुनाव जितने की विवशता। अखिलेश यादव पूरी तरह से बसपा पर निर्भर होते जा रहे हैं। यूपी चुनाव में राहुल गांधी व अखिलेश यादव के गठबंधन पर मुलायम ने नाराजगी जतायी थी लेकिन बसपा के साथ गठबंधन पर मुलायम सिंह को कोई आपत्ति नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा कारण है। मुलायम सिंह यादव ने तमाम परेशानी झेलते हुए भी अखिलेश यादव को पार्टी सौंप दी है यदि लोकसभा चुनाव 2019 में सपा को करारी हार मिलती है तो पार्टी का एक बड़ा गुट शिवपाल यादव के साथ जो सकता है जो मुलायम सिंह कभी नहीं होने देंगे।
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यूपी की सत्ता पर रहेगा अखिलेश यादव का कब्जा, सीएम योगी से होता मुकाबला
सूत्रों की माने तो बसपा के साथ गठबंधन करने पर सपा को भी जबरदस्त फायदा है। बसपा सुप्रीमो मायावती की निगाहे पीएम पद की कुर्सी पर है इसलिए वह अधिक सीट लेकर बहुमत नहीं मिलने पर खुद को पीएम बनाने के लिए अन्य दलों पर दबाव डाल सकेगी। जबकि अखिलेश यादव जानते हैं कि एक बार बसपा सुप्रीमो मायावती को पीएम पद की कुर्सी मिल गयी तो वह भविष्य में यूपी की सीएम नहीं बनेगी। ऐसे में २०२२ में होने वाले यूपी चुनाव में बसपा व सपा के नेता अखिलेश यादव होंगे। उनका सीधा मुकाबला सीएम योगी आदित्यनाथ से होगा।
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Updated on:
28 May 2018, 4:46 PM IST
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