वाराणसी

पीएम नरेन्द्र मोदी के चलते मुलायम सिंह ने उठाया था यह कदम, सपा बैकफुट पर तो बसपा को मिल सकता लाभ

पूर्वांचल में ताकत बढ़ाने के लिए बदली थी रणनीति, जानिए क्या है कहानी
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Updated: 23 Jan 2018, 12:14 PM IST
PM Narendra Modi and Mulayam Singh Yadav
PM Narendra Modi and Mulayam Singh Yadav

वाराणसी. गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लडऩे का ऐलान करके वर्ष2014 में राजनीतिक जगत में हड़कंप मचा दिया था। सपा ने बीजेपी को घेरने के लिए तुरंत ही अपनी रणनीति बदली थी और तत्कालीन सुपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ संसदीय सीट से भी चुनाव लड़ा था। मोदी लहर के बाद भी मुलायम सिंह ने आजमगढ़ से चुनाव जीत कर पूर्वांचल में अपनी ताकत दिखायी थी। देश में एक बार फिर से संसदीय चुनाव २०१९ होने जा रहा है, ऐसे में मुलायम सिंह के आजमगढ़ से चुनाव नहीं लडऩे से सपा को बैकफुट पर आना तय हो गया है।
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यूपी की सत्ता का रास्ता पूर्वांचल से होकर जाता है। यूपी चुनाव 2017 में यह बात फिर साबित हो गयी है। बीजेपी ने नरेन्द्र मोदी को वाराणसी से चुनाव लड़ा कर पूर्वांचल में पार्टी को मजबूत कर लिया है इसके चलते यूपी विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल की अधिकांश सीटों पर बीजेपी को जीत मिली और प्रदेश में पहली बार इतने प्रचंड बहुमत से भगवा सरकार बनी है। पीएम नरेन्द्र मोदी अलगा संसदीय चुनाव किस सीट से लड़ेंगे। इसको लेकर तमाम तरह की अटकले लग रही है, लेकिन जिस तरह से पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने संकेत दिया है कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से संसदीय चुनाव लड़ेंगे। इससे प्रबल संभावना हो गयी है कि आजमगढ़ संसदीय सीट से मुलायम सिंह चुनाव नहीं लडऩे वाले हैं ऐसे में पूर्वांचल के लोगों को सपा से नाराजगी हो सकती है, जिसका फायदा पार्टी के विरोधी दलों को हो सकता है।
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बसपा को होगा सबसे अधिक फायदा, बीजेपी भी पीछे नहीं
मुलायम परिवार एक बार फिर पश्चिम यूपी में सिमटता दिख रहा है, जिसके चलते पूर्वांचल में बसपा को सबसे अधिक लाभ हो सकता है। बीजेपी भी फायदे में दिखायी दे रही है। मुलायम सिंह यादव ने मोदी लहर को ही रोकने के लिए आजमगढ़ संसदीय सीट चुनी है लेकिन अब सीट छोडऩे से मुस्लिम वोटर नाराज होकर बसपा से जुड़ सकते हैं। फिलहाल सपा के नये दांव पर सबकी निगाहे लगी है।
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