धर्म व परंपरा के निर्वहन के लिए दुनिय भर में विख्यात काशी में दोनों पर ही संकट पैदा होता नजर आ रहा है। अब वासंतिक नवरात्र की सप्तमी तिथि को जिस स्थान पर नगरवधुएं जहां संगीतांजलि पेश करती रहीं वहां अब अवैध कब्जा हो गया है। ऐसे में साढ़े तीन सौ साल पुरानी इस परंपरा पर ही ग्रहण लगता नजर आ रहा है। ऐसे में इस इति प्राचीन परंपरा को अक्षुण्ण रखने के लिए नगरवधुओं ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया।
वाराणसी. धर्म व परंपरा के निर्वहन के लिए दुनिया भर में विख्यात काशी की प्राचीन परंपरा पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है। बता दें कि वासंतिक नवरात्र की पंचमी तिथि से तीन दिवसीय महाश्मशाननाथ का वार्षिकोत्सव मनाने की परंपरा साढ़े तीन सौ साल से भी ज्यादा समय से चली आ रही है। वार्षिकोत्सव समारोह के तहत नवरात्र की सप्तमी तिथि को नगरवधुओं नृत्य पेश करती हैं। नगरवधुएं जहां नृत्य करती रही हैं वहां अब कब्जा हो गया है। ऐसे में नगरवधुओं ने इस अतिक्रमण को समय रहते हटाने के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। उन्होंने सोमवार को नृत्य वाली जगह पर धरना भी दिया।
लकड़ी कारोबारियों का है कब्जा
ये प्राचीन परंपरा का निर्वहन महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर स्थित बाबा मसाननाथ मंदिर के समीप होता है। वर्तमान में वहां लकड़ी व्यापारियों का कब्जा हो गया है। ये पहला मौका है जब इस नृत्य वाले स्थान पर अवैध कब्जा हुआ है। हालांकि लकड़ी व्यापारियों को यहां से हटाने की कई दफा कोशिश की गई लेकिन अतिक्रण विरोधी दस्ता के जाते ही हालात जस के तस हो जाते हैं।
दो दिन बाद ही शुरू होना है महाश्मशाननाथ का वार्षिकोत्सव
बाबा महाश्मशान नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष चैनु प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि दो दिन बाद ही यहां बाबा श्मशान नाथ का तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव शुरू होना है। इसके तहत पहले दिन बाबा का रुद्राभिषेक और हवन -पूजन होता है तो दूसरे दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। अतिम निशा में नगर वधुएं बाबा के दरबार में नृत्य पेश करती हैं। नगरवधुओं के नृत्य वाले स्थान पर लकड़ी रखकर कब्जा कर लिया गया है। ऐसे में इस बार नगरवधुओं का नृत्य कहां होगा इसे लेकर संकट पैदा हो गया है।