मीर घाट पर नहाने के दौरान एक किशोरी गंगा नदी में डूबने लगी, जिसके बाद वहां ड्यूटी पर तैनात एक एनडीआरएफ का जवान देवदूत बनकर सामने आया और कुछ ही सेकेंड में उसने किशोरी की जान बचा ली..
वाराणसी: मीर घाट पर नहाने के दौरान एक किशोरी गंगा नदी में डूबने लगी, जिसके बाद वहां ड्यूटी पर तैनात एक एनडीआरएफ का जवान देवदूत बनकर सामने आया और कुछ ही सेकेंड में उसने किशोरी की जान बचा ली। इस पूरी घटना का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि किशोरी डूब रही है और जैसे ही लोग शोर मचाते हैं, कुछ सेकेंड के भीतर ही एनडीआरएफ का जवान पानी में छलांग लगाकर किशोरी की जान बचा लेता है।
जानकारी के मुताबिक, मीर घाट पर बिहार के मुंगेर जिले से आई एक किशोरी गंगा नदी में स्नान कर रही थी। स्नान के दौरान उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गई और डूबने लगी। इसी दौरान वहां एनडीआरफ का एक जवान था, जिसने इस घटना को देखते ही नदी में तुरंत चलांग लगा दी। जवान ने किशोरी को कुछ सेकेंड के भीतर ही संभाल कर पानी से बाहर निकाल लिया।
दरअसल, किशोरी अपने परिवार के साथ से काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन करने के लिए वाराणसी आई हुई थी। इसी दौरान वह स्नान करने के लिए परिवार के साथ मीर घाट पर गई थी। स्नान के दौरान उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में जाकर डूबने लगी। दरअसल, इसी घाट पर एनडीआरएफ के जवान अलेखा चंद जीना की भी ड्यूटी लगी थी और उसने बिना कुछ सोचे समझे गंगा नदी में छलांग लगाकर किशोरी की जान बचाई।
वाराणसी के गंगा घाट पर श्रद्धालु स्नान करने आते हैं और पूजा अर्चन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर एनडीआरएफ के जवानों की तैनाती घाटों पर की गई है, जो 24 घंटे घाटों पर सतर्कता के साथ रहते हैं।
एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि इन जवानों को किसी भी विषम परिस्थितियों में 24 घंटे अलर्ट रहने की ट्रेनिंग दी गई है। इन जवानों की शिफ्ट वाइज ड्यूटी घाटों पर लगाई जाती है। इन जवानों का मुख्य काम गंगा नदी में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सुगमता से स्नान करने की है। यदि इस दौरान कोई श्रद्धालु गहरे पानी में चला जाता है तो जवान बिना अपनी जान की परवाह किए बगैर श्रद्धालु के जीवन की रक्षा को लेकर संकल्पित हैं।