उपचुनाव में हो सकता है प्रयोग, जानिए क्या है कहानी
वाराणसी. सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर व अखिलेश यादव की मुलाकात की बाद सियासत में नये गठजोड़ होने की संभावना बन गयी है। उपचुनाव में सपा व सुभासपा मिल कर चुनाव लड़ सकते हैं। मायावती से गठबंधन टूटने के बाद अखिलेश यादव राजनीति में नये सहयोगी की तलाश में है। बीजेपी से अलग हो जाने के बाद सुभासपा भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए सपा से गठबंधन चाहती है।
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यूपी की 13 सीटों पर उपचुनाव होना है। सीएम योगी आदित्यनाथ के अतिरिक्त अखिलेश यादव व मायावती के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। बीजेपी चुनाव हार जाती है तो यूपी चुनाव २०२२ के पहले विपक्षी दल की ताकत बढ़ जायेगी। ऐसे में बीजेपी नहीं चाहेगी कि वह उपचुनाव हारे। यही हाल सपा व बसपा का भी है। दोनों ही दल गठबंधन के बाद भी संसदीय चुनाव में बड़ी जीत नहीं दर्ज कर पाये थे। सपा व बसपा इस चुनाव में खुद को मजबूत दल बन कर उभरना चाहती है। बीएसपी के पास 10 सांसद है जब अखिलेश यादव की पार्टी यूपी विधानसभा के बाद लोकसभा में भी खराब प्रदर्शन कर चुकी है। अखिलेश यादव को उपचुनाव में अपनी ताकत दिखानी होगी। इसके लिए वह क्षेत्रीय दलों से गठबंधन करने की तैयारी में है जिसमे सुभासपा सबसे खास सहयोगी हो सकती है।
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ओमप्रकाश राजभर की इन तीन सीटों पर लगी निगाहे
यूपी में 13 सीटों पर उपचुनाव होने है। सपा व सुभासपा गठबंधन करके उपचुनाव में प्रयोग करने की तैयारी में है। यदि प्रयोग सफल रहा तो यूपी चुनाव 2022 में भी इसे आजमाया जा सकता है। सुभासपा की असली ताकत पूर्वांचल में है। जबकि जिन 13 सीटों पर उपचुनाव होना है उसमे से 10 सीट पश्चिम यूपी की है जबकि तीन सीटे पूर्वांचल से जुड़ी है। मऊ की घोसी, अम्बेडकर नगर की जलालपुर व बहराइच की एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। यहां पर सुभासपा अपना संगठन मजबूत करने में लगी है। सूत्रों की माने तो सपा के साथ गठबंधन होने पर सुभासपा को इन तीन सीट पर प्रत्याशी उतारने का मौका मिल सकता है यदि ऐसा हुआ तो सुभासपा को बड़ा लाभ हो सकता है। सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर ने पत्रिका को बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर व पूर्व सीएम अखिलेश यादव की मुलाकत हुई है। दो बड़े नेता मिलते हैं तो कई बाते होती है। सुभासपा का किससे गठबंधन होता है या नहीं। यह तो राष्ट्रीय अध्यक्ष ही तय करेंगे। हम लोग पूर्वांचल में संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए हैं ताकि बीजेपी के झूठ को बेनकाब कर सके।
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