
वाराणसी. पांच राज्यों का चुनाव परिणाम लगभग सामने आ गया है। मध्य प्रदेश को छोड़ दिया जाये तो राजस्थान व छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सराकर बनती दिख रही है। पांच राज्यों का चुनाव परिणाम पूर्वांचल की राजनीति को बड़ा प्रभावित करेगा। इन राज्यों में दो नेता ऐसे हैं जिनकी बात मानना अब बीजेपी की विवशता बन जायेगी। बीजेपी ने ऐसा नहीं किया तो लोकसभा चुनाव 2019 में नुकसान उठाना तय हैं।
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बीजेपी को लोकसभा चुनाव 2019 में पूर्ण बहुमत लाने के लिए यूपी की 80 संसदीय सीट पर जबरदस्त प्रदर्शन करना होगा। लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी व अनुप्रिया पटेल की अपना दल गठबंधन को 73 सीट मिली थी जो तीन सीटों पर उपचुनाव में बीजेपी की हार के बाद कम होकर 70 हो गयी । मध्य प्रदेश व राजस्थान के चुनाव परिणाम ने छोटे दलों की ताकत को एक बार फिर साबित किया है। बीजेपी गठबंधन में अपना दल व ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा है। सुभासपा से बीजेपी के रिश्ते बेहद खराब चल रहे हैं। ओमप्रकाश राजभर लगातार बीजेपी पर हमला बोलने में जुटे हुए हैं इसके बाद भी बीजेपी ने ओमप्रकाश राजभर को गठबंधन से अलग नहीं किया है। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी कमजोर हुई हैं ऐसे में बीजेपी को अब ओमप्रकाश राजभर व अनुप्रिया पटेल की बात माननी होगी।
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तेजी से कम हो रही एनडीए की ताकत
एनडीए से चंद्रबाबू नायडू, उद्वव ठाकरे की शिवसेना व बिहार में उपेन्द्र कुशवाहा अलग हो चुके हैं। पीएम नरेन्द्र मोदी की लहर भी कमजोर हो रही है और अमित शाह की रणनीति भी पहले जैसा रिजल्ट लाने में नाकाम साबित हो रही है ऐसे में एनडीए को अपने सहयोगी दलों की बात माननी होगी। ऐसा नहीं किया तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ कांटे का संघर्ष हुआ तो अन्य दलों का समर्थन लेना बीजेपी के लिए कठिन हो जायेगा।
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काम आयेगी छोटे दलों की ताकत
पांच राज्यों के परिणाम ने यूपी में राहुल गांधी, मायावती व अखिलेश यादव के संभावित महागठबंधन की राह आसान कर दी है। मायावती को जाघव कैडर वोटरों का साथ मिलेगा तो अखिलेश के साथ यादव वोटर जायेंगे। कांग्रेस को भी अपने कैडर वोटरों का मत मिलेगा। ऐसे में जातिगत वोटरों को साधने के लिए ओमप्रकाश राजभर व अनुप्रिया पटेल जैसे नेता बहुत काम आयेंगे। बीजेपी ने अनिल राजभर को बहुत मौका दिया है लेकिन वह राजभरों के बड़े नेता नहीं बन पाये। ओमप्रकाश राजभर को ही राजभर समाज का सबसे बड़ा नेता माना जाता है। पटेल वोटों पर सबसे अधिक पकड़ अनुप्रिया पटेल की है जबकि उनकी माता श्रीमती कृष्णा पटेल भी पटेल वोटरों पर पकड़ पाने के प्रयास में लगी हुई है लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को अपना दल व सुभासपा को अब अधिक सीट देना होगा। ऐसा नहीं किया तो बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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