
वाराणसी. गठबंधन में होने के बाद भी बीजेपी व सुभासपा की लड़ाई जारी है। यूपी के कैबिनेट मंत्री व सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने 27 अक्टूबर को लखनऊ में रैली बुलायी है इस रैली में आये हुए लोगों से पूछा जायेगा कि बीजेपी के साथ रहे या फिर उन्हें छोड़ दिया जाये। जनता ने बीजेपी का साथ छोडऩे की बात कही तो मंच से ही ओमप्रकाश राजभर अपना इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद दूसरे गठबंधन के साथ मिल कर लोकसभा चुनाव 2019 लड़ेंगे। इसको लेकर पर्दे के पीछे से डील हो चुकी है।
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बीजेपी ने यूपी चुनाव 2017 अनुप्रिया पटेल व ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा से गठबंधन करके जीता है। चुनाव जीतने के बाद ओमप्रकाश राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के कुछ दिन बाद ही सीएम योगी व ओमप्रकाश राजभर के बीच संबंध खराब हो गये थे। इसके बाद ओमप्रकाश राजभर को जब भी मौका मिलता है वह सीएम योगी सरकार पर हमला बोलने का मौका नहीं छोड़ते हैं। ओमप्रकाश राजभर ने अब बीजेपी के साथ आर-पार की लड़ाई लडऩे की तैयारी की है इसी क्रम में लखनऊ में 27 अक्टूबर को विशाल रैली बुलायी गयी है। पार्टी के लोगों का दावा है कि इस रैली में दस लाख की भीड़ जुटायी जायेगी। पार्टी के वोटर ही तय करेंगे कि बीजेपी गठबंधन में रहना है कि नहीं।
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बीजेपी से टूटा गठबंधन तो महागठबंधन के साथ जायेगी सुभासपा
सुभासपा के सूत्रों ने बताया कि बीजेपी से गठबंधन टूटा तो अखिलेश यादव, मायावती व राहुल गांधी को बनने वाले महागठबंधन में सुभासपा शामिल हो जायेगी। इसके लिए पर्दे के पीछे से वार्ता चल रही है। सुभासपा का दावा है कि हम लोगों ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया जो पूर्वांचल में भगवा पार्टी को लोकसभा चुनाव में एक सीट भी नहीं मिलने वाली है। महागठबंधन में सुभासपा मिल जाती है तो बीजेपी को सबसे अधिक नुकसान उठाना होगा।
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सहयोगी दल के कार्यालय के लिए जगह नहीं, शिवपाल यादव व राजा भैया को मिल रहा बंगला
सुभासपा सूत्रों ने कहा कि ओमप्रकाश राजभर ने यूपी सरकार से पार्टी का कार्यालय खोलने के लिए जगह मांगी थी लेकिन हम लोगों को जगह नहीं दी जा रही है। बीजेपी का सहयोगी दल होने के बाद भी हम लोगों की बात नहीं सुनी गयी है। दूसरी तरफ यूपी सरकार ने शिवपाल यादव व राजा भैया को बंगला दिया है जो गठबंधन में शामिल नहीं है। अब समय आ गया है कि बीजेपी को हम लोगों की बात का जबाव देना होगा। कार्यालय के लिए कमरा नहीं मिलता है तो मंत्री ऑफिस को ही कार्यालय बना लेंगे।
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