
वाराणसी. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में देश के पहले पर्यावरण कुंभ का आयोजन १ दिसम्बर से किया जायेगा। दो दिवसीय पर्यावरण कुंभ का उद्घाटन केन्द्रीय केन्द्रीय राज्यमंत्री डा.महेश शर्मा व डिप्टी सीएम डा.दिनेश शर्मा करेंगे। पर्यावरण कुंभ में तीन दिवसीय प्रदर्शनी का भी उद्घाटन सुबह 11 बजे किया जायेगा। जबकि दोपहर दो बजे दो कार्यक्रम का उद्घाटन होगा।शुक्रवार को वीसी प्रो.टीएन सिंह ने मीडिया को पर्यावरण कुंभ से जुड़ी जानकारी दी।
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पर्यावरण कुंभ के लिए परिसर के खेल मैदान में तीन बड़े पंडाल लगाये गये हैं। बड़े पंडाल में मुख्य कार्यक्रम होगा। जब दो अन्य पंडाल में प्रदर्शनी व पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए बनाये गये देशी उपकरणों का स्टॉल लगाया जायेगा। आयोजन में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले किसी चीज का प्रयोग नहीं होगा। समुद्र मंथन को दिखाने के लिए बालू पर खूबसूरती के साथ तस्वीर उकेरी गयी है। पंडाल के बाहर लगायी गयी कलाकुर्ति से भी पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया जा रहा है।
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तीन हजार पहुंचते ही बंद करना पड़ा पंजीकरण
विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन हजार पंजीकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया था और संख्या तीन हजार पहुंचते ही पंजीकरण बंद करना पड़ा। वीसी ने कहा कि इसके बाद भी पंजीकरण कराने वालों की लाइन लगी है लेकिन संसाधन के अनुसार ही पंजीकरण किया गया है।
छायाचित्र प्रदर्शनी के लिए आये 500 चित्र
पर्यावरण कुंभ में छायाचित्र प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी के लिए कुल पांच सौ छायाचित्र आये थे जिसमे से तीन सौ का चयान किया गया है। छायाचित्र के माध्यम से भी पर्यावरण रक्षा का संदेश दिया जायेगा। तीन दिवसीय प्रदर्शनी बेहद खास होगी। प्रदर्शनी में पर्यावरण रक्षा को लेकर नवीन जानकारी दी जायेगी।
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इन पांच विषयों पर होगा मंथन
जिस तरह से समुद्र मंथन कर अमृत व विष दोनों ही निकाला गया था उसी तरह पर्यावरण कुंभ के जरिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के साथ रक्षा करने का अमृत निकलेगा। पर्यावरण कुंभ में पर्यावरण , उपभोक्तावाद, ऊर्जा, कृषि एंव भारतीय परम्पराओं में पर्यावरण की अवधारणा विषय पर चर्चा होगी। पर्यावरण कुंभ में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से २४९ संस्था जुड़ी है।
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पर्यावरण को हो रहा नुकसान, अब यह हो रहा असर
वीसी प्रो.टीएन सिंह ने कहा कि पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंच रहा है। देश की ऊर्जा का ७३ प्रतिशत कोयले से पूरा होता है। कोयले के चलते पर्यावरण में कार्बन का उत्सर्जन बहुत हो रहा है जिससे बड़ा नुकसान पहुंच रहा है। खेती में रासायनिक पदार्थों का जमकर प्रयोग करके से खेतों की उर्वरा क्षमता घट रही है जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पानी का अंधाधुंध प्रयोग होने से प्रत्येक साल एक से दो फीट भूजल स्तर गिरता जा रहा है। वातावरण में इतना अधिक प्रदूषण हो गया है कि अब लोगों को सास लेने के लिए शुद्व हवा नहीं मिलती। पर्यावरण को हुए नुकसान का सबसे अधिक प्रभाव जलवायू पर पड़ा है जलवायू परिवर्तन के चलते दुनिया क अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है ऐसे में पर्यावरण कुंभ के माध्यम से अपने वातावरण की रक्षा करने का प्रयास किया जा रहा है। पत्रकार वार्ता में कुलसचिव डा.साहब लाल मौर्य, चीफ प्राक्टर प्रो.शम्भु उपाध्याय, पत्रकारिता संस्थान के निदेशक प्रो.ओमप्रकाश सिंह आदि लोग उपस्थित थे।
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