- पीएम का कार्यालय बेचकर करोड़पति बनने की ख्वाहिश- कमीशन से स्कूल बस लेना चाहता था अध्यापक- टीचर, चायवाला, हलवाई और बिजली मिस्त्री ने रची साजिश
वाराणसी. प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय कार्यालय बेचकर करोड़ों की कमाई करने वाले आरोपियों ने पुलिस के सामने कई खुलासे किए हैं। शुक्रवार को एकाएक पीएम मोदी के संसदीय कार्यालय को ओएलएक्स पर बेचने की खबर आते ही पुलिस व प्रशासन में हड़कंप मच गया। आननफानन में आरोपियों का पता लगाकर चार को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पीएमओ को बेचने का आईडिया चाय पीते-पीते आया। चारों ने प्लान बनाया और उसे अमलीजामा पहना दिया। साढ़े सात करोड़ की डील पर पीएमओ को बेच कर मोटी कमाई का सुनहरा सपना देखने वाले आरोपियों ने इस पैसे से अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने की योजना बनाई थी। मुख्य आरोपित लक्ष्मीकांत ओझा ने कमीशन के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन डाला था। इससे बच्चों के लिए स्कूल बस लेना चाहता था। अन्य आरोपितों में मनोज यादव गांधी चाौक खोजवा में दूध-दही की दुकान चलाता है। बाबूलाल पटेल बिजली मिस्त्री है। जितेंद्र कुमार वर्मा गुरुधाम कालोनी स्थित बैंक आफ बड़ौदा के सामने चाय की दुकान चलाता है। पुलिस के अनुसार आरोपियों की पकड़ की सफलता पुलिस को उनके मोबाइल सर्विलांस पर लगाने से मिली।
पिछले दिनों वाणिज्यिक साइट पर संसदीय कार्यालय को बेचने का विज्ञापन जारी होने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। पीएमओ की कीमत साढ़े सात करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। मुख्य आरोपित लक्ष्मीकांत ओझा ने ही इसे पोस्ट किया था।विज्ञापन में पीएम संसदीय कार्यालय के चार फोटो भी पोस्ट किए गए थे। इसके अलावा पोस्ट में भवन का स्पेस एरिया 6500 स्क्वाएर फिट बताया गया था। मुख्य आरोपित लक्ष्मीकांत ओझा नियामतबाद, अलीनगर में दिव्यांग बच्चों के स्कूल का अध्यापक है। उधर, मामले की जानकारी होते ही एसएसपी अमित पाठक ने तत्काल ही इस विज्ञापन को साइट से हटवा दिया।
विज्ञापन में दिया गलत पता
साचिशकर्ताओं ने पीएमओ का इश्तिहार तो दे डाला लेकिन उसमें पता गलत बताया। वाराणसी में पीएम मोदी का कार्यालय गुरुधाम कालोनी में है जबकि विज्ञापन में कार्यालय का पता कृष्ण देव नगर बताया गया था।