
वाराणसी. दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण की कोशिश की जा रही है। बनारस जहां की आबो हवा बद से बदतर है,जहां ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने की जरूरत है। वहां विश्वनाथ मंदिर प्रशासन सरस्वती फाटक इलाके के प्राचीन पीपल के हरे वृक्ष को सूखा करार देते हुए कटवा दिया। वो वृक्ष जिससे सबसे ज्यादा आक्सीजन मिलता है। जो कार्बन डाइ आक्साइड को ग्रहण करता है। पर्यावरण को संरक्षित करता है। इसके लिए क्षेत्रीय नागरिकों ने पहले भी धरना दिया था, विरोध दर्ज कराया था, लेकिन उनकी एक न सुनी गई। ऐसे में विश्व पर्यावरण दिवस पर क्षेत्र के बच्चों ने सिर पर पीपल की डाल बांध कर जहां रैली निकाली वहीं आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र सहाय ने अपने साथियों के साथ सरस्वती फाटक क्षेत्र में धरना दिया। बता दें कि आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र सहाय विभिन्न माध्यमों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आवाज उठाते आ रहे हैं।
सहाय ने इस पेड़ को काटे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया था। बावजूद इसके रविंद्र सहाय इस 150 साल पुराने पेड़ को काटे जाने के खिलाफ संघर्षरत हैं। वे नगर निगम और वन विभाग की अनुमति के बगैर पेड़ काटे जाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी यह कोशिश है कि पेड़ की बची जड़ों को संरक्षित रखने के लिये लोग आगे आएं। सामाजिक कार्यकर्ता रविंद्र सहाय शासन-प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से इसे बचाने की कोशिश में लगे हैं।
बता दें कि काफी जद्दोजहद के बाद प्रशासन ने सिर्फ तीन लोगों के धरने की अनुमति दी थी। इसके मुताबिक महज तीन लोग ही धरने पर बैठे। इनके समर्थन में धरना स्थल पर धरोहर बचाओ समिति के लोगों के अलावा क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे। धरने के दौरान छोटे छोटे बच्चे पेड़ बचाओ का उदघोष करते चक्रमण कर रहे थे। उनकी नारेबाजी से वहां गुजर रहे दर्शनार्थी और राहगीर कुछ देर के लिये ठहर जा रहे थे और वास्तविकता का पता चलने पर प्रशासन की इस कार्यवाही पर अफसोस जता रहे थे। धरना मंगलवार तीसरे पहर तीन बजे शुरू हुआ जो शाम सात बजे तक चलेगा।
धरने के दौरान ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरने को समर्थन का संदेश आया। उस वक्त स्वामीश्रि: लालपुर में मंदिर बचाओ आंदोलन की सभा कर रहे थे। सहाय ने उनके संदेश को पढ़कर सुनाया।
धरने पर रविंद्र सहाय के साथ डॉ राकेश्वरी प्रसाद, अजीत राय, संतोष सिंह, महेश उपाध्याय, राजनाथ तिवारी, कृष्ण कुमार शर्मा, राजेंद्र तिवारी, जंत्रलेश्वर यादव, रविकांत यादव पप्पू, राजकुमार कपूर, सदन यादव, धर्मेंद्र ठाकुर, पियूष नवलगढ़िया आदि लोग मौजूद रहे।