वाराणसी

कांग्रेस के नये दांव से उड़ी अखिलेश यादव की नीद, बसपा को लेकर करना पड़ा यह ऐलान

लोकसभा चुनाव 2019 के पहले बन सकता है नया समीकरण, बीजेपी ने भी लगायी निगाहे
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Updated: 15 Jun 2018, 7:59 PM IST
Akhilesh Yadav and Rahul Gandhi
Akhilesh Yadav and Rahul Gandhi

वाराणसी. कांग्रेस के नये दांव से अखिलेश यादव की नीद उड़ गयी है। बसपा के चलते ही सपा ने बड़ा ऐलान किया है। महागठबंधन को देखते हुए बीजेपी भी सक्रिय हो गयी है और अब लेाकसभा चुनाव 2019 के पहले नया समीकरण बन सकता है। बीजेपी को रोकने के लिए विरोधी दलों ने महागठबंधन करने का ऐलान किया है लेकिन अब खेल बदल भी सकता है।
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मायावती व अखिलेश यादव की पार्टी ने गठबंधन करने का ऐलान किया हुआ है। गठबंधन में कांग्र्रेस के शामिल होने को लेकर संदेह है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व अखिलेश यादव के बीच की राजनीतिक नजदीकी किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में कांग्रेस चाहती है कि यूपी में होने वाले महागठबंधन में उसे भी शामिल किया जाये। पूर्वांचल की सीटों पर सपा, बसपा के साथ कांग्रेस को भी हिस्सेदारी मिले। यूपी की राजनीति में सपा व बसपा को नकारा नहीं जा सकता है लेकिन यूपी के बाहर सपा से अधिक मायावती की ताकत दिखती है। लोकसभा चुनाव २०१९ के पहले छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन तीनों राज्यों की सत्ता पर बीजेपी का कब्जा है। कांग्रेस चाहती है कि तीनों राज्यों को जीत कर लोकसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी को बैकफुट पर ला दिया जाये। कांग्रेस ने इसके लिए तीनों राज्यों में बसपा से गठबंधन करने की तैयारी की है जबकि मध्यप्रदेश में सपा को भी कुछ सीट मिलती है इसके बाद भी कांग्रेस ने सपा से अधिक बसपा पर जोर दिया है। अखिलेश यादव को यह बात पंसद नहीं आयी है ओर उन्होंने पहले ही मध्यप्रदेश में अकेले ही चुनाव लडऩे का ऐलान किया है ताकि कांग्रेस को अपनी ताकत दिखायी जा सके।
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कांग्रेस को नहीं मिला सपा के साथ का फायदा
कांग्रेस व सपा ने मिल कर यूपी का विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन दोनों ही दलों को करारी हार मिली है। गठबंधन के तहत कांग्रेस व सपा के वोट बैंक एक दूसरे को नहीं मिल पाये। कांग्रेस के साथ सवर्ण वोट बैंक अधिक है जबकि सपा के साथ यादव व मुस्लिम। दोनों के कैडर वोटर अपने दल के प्रत्याशी को वोट दिये थे लेकिन गठबंधन के तहत दूसरे दल के साथ नहीं गये थे। बसपा व कांग्रेस का गठबंधन होता है तो कहानी बदल जायेगी। मायावती के कहने पर बसपा का कैडर वोटर दूसरे दल को भी वोट दे सकता है यह बाद गोरखपुर, फूलपुर व कैराना संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में भी सामने आयी है। ऐसे में कांग्रेस जानती है कि पीएम नरेन्द्र मोदी को चुनाव में शिकस्त देनी है तो सपा से अधिक बसपा से गठबंधन करने पर फायदा मिलेगा। एक बार कांग्रेस व बसपा का गठबंधन हो जाता है तो मुस्लिम वोटर भी बीजेपी को हराने के नाम पर जुड़ जायेंगे। इसके अतिरिक्त कांग्रेस को यूपी के साथ अन्य राज्यों में भी बसपा से गठबंधन का लाभ मिलेगा। इसके चलते कांग्रेस ने बसपा से गठबंधन करने की योजना बनायी है जिससे सपा परेशान हो गयी है इसके चलते ही सपा ने राहुल गांधी के इफ्तार पार्टी में शिरकत नहीं किया और अखिलेश यादव ने बसपा से कम सीटों पर भी चुनाव लडऩे का ऐलान किया, जिससे सपा व बसपा गठबंधन में कांग्रेस सेंधमारी न कर पाये।
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