
वाराणसी. श्रावण मास की पूर्णिमा पर राखी का त्योहार माना जाता है। इस दिन बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनके लम्बी उम्र की कामना करती है वहीं भाई भी अपनी बहन की रक्षा का बचन लेता है। उसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं।
शुभ मुहूर्त
सावन के पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 03:45 (14 अगस्त से) से ही हो जाएगी और इसका समापन 06:58 (15 अगस्त) को हो जाएगा। खास बात ये भी है कि कई सालों के बाद यह पहली बार होगा जब राखी के मौके पर भद्रा का साया नहीं होगा।
इसलिए दाएं हाथ में बांधी जाती है राखी
हमेशा भाई के दाहिने कलाई पर राखी बांधनी चाहिए। हिंदू धर्म में हमेशा दांए हाथ को शुभ माना गया है। इसलिए पूजा-पाठ या शुभ काम हमेशा दाहिने हाथ से करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि रक्षा सूत्र बांधने से ब्रह्मा विष्णु, महेश, लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा सभी का आर्शीवाद प्राप्त होता है। यही वजह है कि राखी हमेशा दाएं हाथ में बांधा जाना जाना चाहिए।
इस मंत्र के साथ बांधे राखी
येन बद्धो बलिराजा, दानवेन्द्रो महाबलः तेनत्वाम प्रति बद्धनामि रक्षे, माचल-माचलः'
इसका मतलब- 'जिस रक्षासूत्र से शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा बंधन से मैं तुम्हें बांधता हूं, ये तुम्हारी रक्षा करेगा।'