
वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर डीजीपी ओपी सिंह तक ने निर्देश दिया है कि सड़कों पर अतिक्रमण होता है तो स्थानीय थानेदार जिम्मेदार होगे। इसके बाद भी बनारस की सड़कों पर अतिक्रमण कम होने की बजाये बढ़ता ही गया। सड़कों पर जब चलना ही मुश्किल हो गया तो वरिष्ठ अधिकारियों को खुद ही अतिक्रमणक हटवा कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करनी पड़ी है, जिसको लेकर हड़कंप मचा हुआ है।
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जनवरी 2018 में बनारस में प्रवासी सम्मेलन होना है। प्रवासी भारतीय सम्मेलन की तैयारी में सबसे बड़ी समस्या शहर का ट्रैफिक है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि खुद सीएम योगी आदित्यनाथ को ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर चेतावनी जारी करनी पड़ी है। सीएम योगी के जाने के बाद जिला व पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय हो गये हैं और देर रात तक सड़कों पर खुद उतर कर अतिक्रमण हटवाने के साथ जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। कमिश्रर दीपक अग्रवाल, डीएम सुरेन्द्र सिंह, एसएसपी आनंद कुलकर्णी, वीडीए वीसी राजेश कुमार, सीडीओ गौरांग राठी सहित पुलिस के अन्य अधिकारी खुद सड़क पर उतर कर अतिक्रमण करने वालों पर कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि यह जिम्मेदारी स्थानीय थानेदार की होती है लेकिन स्थानीय पुलिस की उदासीनता से अतिक्रमण हटने की जगह बढ़ता ही जा रहा है।
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अभियान के बाद फिर हो जाता है अतिक्रमण
शहर की सड़कों को अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए लगातार अभियान चलता रहा है लेकिन उसका खास असर नहीं होता है। अभियान चलाने वाली टीम जब अतिक्रमण हटा कर वापस चली जाती है तो स्थानीय पुलिस की अनदेखी से फिर इन जगहों पर अतिक्रमण हो जाता है। बड़ा सवाल है कि अधिकारियों को अब विकास कार्य छोड़ कर सड़क का अतिक्रमण हटाना पड़ रहा है और स्थानीय थानेदार आराम से अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होकर अतिक्रमणकारियों पर नजरे इनायत करने में जुटे हैं।
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