शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आज गंगा पूजन कर अपनी धर्म युद्ध यात्रा का शंखनाद कर दिया है। वह शनिवार की सुबह पूजा पाठ के बाद लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे...
वाराणसी: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर गंगा पूजन के बाद अपनी धर्म युद्ध यात्रा का शंखनाद कर दिया है। शनिवार को वह चिंतामणि गणेश मंदिर में पूजा-पथ और संकटमोचन मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद वह लखनऊ के लिए प्रस्थान कर जाएंगे। इस दौरान वह गाय को राज्य माता का दर्जा दिलवाने के लिए लखनऊ के कांसीराम उपवान में प्रदर्शन करेंगे।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने शुक्रवार को छत्रपति शिवाजी महाराज के जयंती पर काशी के शंकराचार्य घाट पर गंगा पूजन कर अपनी ‘गो-प्रतिष्ठार्थ धर्म युद्ध शंखनाद‘ यात्रा का शंखनाद कर दिया है। शनिवार को वह चिंतामणि गणेश मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे और संकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद लखनऊ के लिए रवाना हो जाएंगे।
शंकराचार्य ने बताया कि वह काशी से निकलकर जौनपुर, सुल्तानपुर और रायबरेली होते हुए लखनऊ पहुंचेंगे। इस दौरान कई स्थानों पर जनसभा भी की जाएगी। शंकराचार्य ने कहा कि जो सच्चा हिंदू होता है वह किसी भी हाल में गौ माता की हत्या को बर्दाश्त नहीं कर सकता, इसीलिए छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाते हुए शनिवार की सुबह हम लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे।
लखनऊ में प्रदर्शन के लिए परमिशन की बात पर शंकराचार्य ने कहा कि 21 फरवरी को ही हमने इसके लिए आवेदन कर दिया था और इंटरनेट पर वह प्रक्रिया में दिख रहा है। हमें उम्मीद है उस समय तक प्रोसेस पूरा हो जाएगा और परमिशन मिल जाएगी। शंकराचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा ही है कि वह हमारा स्वागत करेंगे, तो उनकी मर्जी है तो हमें परमिशन मिल ही जाएगी। ऐसा कहीं नहीं होता कि कोई स्वागत करता है और अपना घर का दरवाजा बंद कर ले।
उन्होंने कहा कि हम तो अपनी यात्रा लेकर निकल रहे हैं। परमिशन मिले चाहे ना मिले हम फिलहाल यह मां के चल रहे हैं कि हमें परमिशन दी जाएगी। शंकराचार्य ने कहा कि उनकी इस लड़ाई में जो लोग भी लखनऊ पहुंचकर उनका समर्थन करेंगे वे सभी लोग उनके साथ हैं। शंकराचार्य ने दावा किया है कि चारों पीठों के शंकराचार्य का उन्हें समर्थन मिला है और वह हमारे साथ जरूर खड़े होंगे।