
वाराणसी. बेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी को मात देकर सोनिया सिंह ने मिसेज इंडिया का खिताब जीत कर खुद को साबित कर दिया है। काशी की इस बेटी ने हौसला व आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल पेश की है जो दूसरों के लिए प्रेरणादायक है। मिसेज कर्नाटका का ताज जीत चुकी सोनिया का सबसे बड़ा सपना मिसेज इंडिया का खिताब जीतना था जो अब पूरा हो गया है। चेन्नई में 30 जुलाई को हुई प्रतियोगिता में सोनिया को मिसेज इंडिया का ताज पहनाया गया।
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सोनिया का यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था। पांच साल पहले जब सोनिया को भयंकर सिरदर्द होता था तो उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि इतनी गंभीर बीमारी से पीडि़त है। उस समय सोनिया का तीन माह का बेटा था। सिर में इतना तेज दर्द होता था कि कुछ खाना तक संभव नहीं था। 2013 में सोनिया ने ब्रेन ट्यूमर के विशेषज्ञ डा.एनके वेंकटरमण को अपनी बीमारी दिखायी। जांच के बाद पता चला कि मेडुलरी सायटिक ट्यूमर हुआ है। गंभीर बीमारी की जानकारी होते ही एक पल के लिए सोनिया को लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है। इसके बाद सोनिया ने बीमारी से लडऩे का निर्णय किया। परिजनों का पूरा साथ मिला और सोनिया का आत्मविश्वास काम आया। बे्रन ट्यूमर को मात देकर सोनिया ने अपनी कंपनी तक स्टार्ट की। सोनिया ने एयरहोस्टेस की नौकरी की थी इसलिए हौसले की उड़ान को वह जानती थी। मेहनत और लगन से मनचाहा मुकाम पा कर खुद को साबित कर दिया है।
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बेहद कठिन था यहां तक पहुंचने का सफर
सोनिया का यहां तक पहुंचने का सफर बेहद कठिन था। गंभीर बीमारी का सोनिया के शरीर पर प्रभाव पड़ा था। सोनिया ने ब्यूटी कंपटीशन जीतने का संकल्प लिया था और उसकी तैयारी में जुट गयी थी। हाई हिल की सैंडल पहनना बहुत कठिन था। घंटों तक सैंडिल पहनने से पैरों में सूजन आ जाती थी। रात की नींद तक गायब हो गयी थी जिसके चलते चेहरे पर थकान दिखने लगती थी। सोनिया ने कभी हिम्मत नहीं हारी और मेहनत के बल बंगलूरू में आयेजित मिसेज कर्नाटका प्रतियोगिता जीती। इसके बाद मिसेज इंडिया कांस्टेट में क्वालिफाई किया। इसके बाद मिसेज इंडिया प्रतियोगिता जीत कर अपने सपने को पूरा कर लिया। सोनिया अपने पति के साथ बंगलूरु में रहती है और जो मुकाम पा लिया है परिजनों को अपनी बेटी व बहू पर गर्व है। सोनिया को आज भी काशी की याद आती है। बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर काशी की गलियों को सोनिया कभी भूल नहीं सकती है आंख बंद करती है तो बनारस शहर दिखने लगता है।
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