
प्रतापगढ़. उपचुनाव में पूरे प्रदेश की निगाहें प्रतापगढ़ सदर सीट पर टिकी थी। सपा को उम्मीद थी कि इस सीट पर वो अपना दल के उम्मीदवार को चुनाव में मात दे देंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अपना दल के उम्मीदवार ने सपा प्रत्याशी को तकरीबन 29 हजार से अधिक मतों से पराजित कर दिया। अब इस विधानसभा सीट पर सपा के नेता लगातार लोगों से फोन कर पूछ रहे हैं कि आखिर क्या वजह रही जिससे यहां सपा को हार का सामना करना पड़ा रहा है।
1- बाहरी उम्मीदवार होने से हुआ नुकसान
सपा के लिए सबसे बड़ी परेशानी ये हुई कि बृजेश वर्मा मूलरूप से अंबेडकरनगर जिले के रहने वाले थे। पेशे से कारोबारी बृजेश को यहां लाकर चुनाव लड़ाना काफी जोखिम भरा रहा। स्थानीय नेता भी बृजेश को यहां से टिकट न देने के पक्ष में थे लेकिन पूर्व सीएम की टीम ने बृजेश के नाम पर मुहर लगाई जिसके बाद बृजेश को टिकट मिल गया।
2- एआईएमआईएम उम्मीदवार की मजबूती भी बढ़ाई मुश्किल
सपा प्रत्याशी के हार की दूसरी सबसे बड़ी वजह जो बताई जा रही है वो ये कि यहां से एआईएमआईएम उम्मीदवार ने जिस इसरार अहमद को उम्मीदवार बनाय़ा था वो बहुत मजबूती से चुनाव लड़ गये। मुस्लिम वोटरों का तकरीबन एकतरफा उस ओर मतदान कर देना सपा प्रत्याशी के लिए हार का कारण बन गया।
3- भाजपा के मूल वोटबैंक में सेंध नहीं लगा सकी सपा
अखिलेश यादव ने सपा के बृजेश वर्मा को टिकट ही इसलिए दिया था कि इनके पिता सीताराम वर्मा भी बड़े कारोबारी थे। जो सालों से इसी जिले में रहकर राजनीति करते थे। पेश से प्रापर्टी और ईंट भट्ठे के कारोबारी बृजेश के परिवार की यहां के सवर्ण मतदाताओं में खासी पकड़ मानी जाती थी। लेकिन बृजेश इन वोटों को एकजुट नहीं कर सके जिसके कारण इन्हे हार का सामना करना पड़ा।
4-अपने ही कार्यकर्ताओं की नाराजगी पड़ी भारी
हार की सबसे बड़ी वजह जो बताई जा रही है वो ये कि यहां से बृजेश को मैदान में उतारने के बाद जिले के कई सपा नेताओं का आपसी विरोध काफी ऊपर था। उनका मानना था कि अगर यहां कोई बाहरी उम्मीदवार चुनाव जीत जाएगा तो आगे की राजनीति के लिए मुश्किल होगी। ऐसे में आपसी मनमुटाव हार का कारण बनी।
5- बड़े नेताओं ने भी निराश किया
सपा खेमें में पहले से ही चर्चा थी कि स्थानीय नेताओं का साथ न मिल पाना सपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। हुआ भी ऐसा ही। इस सीट पर सपा संगठन के बड़े नेताओं का साथ भी प्रत्याशी को नहीं मिला। कोई भी बड़ी रैली यहां आयोजित नहीं की गई जिससे बड़े वोटबैंक को सपा के साथ जोड़ा जाता। इन कारणों की वजह से सपा को इस सीट पर