श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में तमिलनाडु से पहुंचे श्रद्धालुओं द्वारा प्राचीन तमिल ग्रंथ 'तिरुवासगम' का संपूर्ण पाठ किया गया। कुल 658 गीतों से युक्त पवित्र ग्रंथ का क्रम में पाठ किया गया, जिसमें करीब 5.30 घंटे का वक्त लगा...
वाराणसी: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में सोमवार को तमिलनाडु से आए श्रद्धालुओं ने एक विशेष धार्मिक आयोजन किया और बाबा विश्वनाथ के प्रति अपनी आस्था और अद्भुत भक्ति का परिचय दिया। यहां पहुंचे श्रद्धालुओं ने ‘अम्माचियारम्मन तिरुवासगम संपूर्ण पाठ प्रार्थना समूह’ के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में मंदिर परिसर को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। तमिलनाडु से आए इस समूह का नेतृत्व जी मुथुमदसामी ने किया।
इस अवसर पर तमिलनाडु से श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे श्रद्धालुओं द्वारा प्राचीन तमिल ग्रंथ 'तिरुवासगम' का संपूर्ण पाठ किया गया। इस ग्रन्थ में मौजूद कुल 658 गीतों का क्रमवार पाठ किया गया, जिसमें करीब 5.30 घंटे का वक्त लगा। इस ग्रंथ को महान संत माणिक्कवाचगर ने रचा है और यह भगवान भोलेनाथ का प्रति पूर्णतः समर्पित है और इसे प्रेम और भक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। पाठ के दौरान सभी श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।
जिस दौरान पाठ किया जा रहा था उस दौरान मंदिर परिसर में भक्तों द्वारा हर हर महादेव का उद्घोष भी किया जा रहा था। श्रद्धालुओं के मुख से निकल रहे श्लोक शोक की गूंज ने पूरे परिसर को शिवमय बना दिया। आयोजन के दौरान अनुशासन और व्यवस्था का भी ध्यान रखा गया, जिससे यह कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। वहीं, कार्यक्रम के लिए मंदिर प्रशासन द्वारा सभी जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता कराई गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा न हो।
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें दक्षिण भारत के शिव भक्तों ने उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थल पर अपनी धार्मिक परंपरा का प्रदर्शन किया और इस दृश्य ने भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता की मिसाल पेश की। यहां भाषा, क्षेत्र और परंपरा अलग-अलग थी, लेकिन श्रद्धालुओं के भाव एक ही थे और वह भगवान शिव की भक्ति में लीन नजर आए।
इस कार्यक्रम के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस अंगूठे आयोजन को देखा और उसकी भूरी भूरी प्रशंसा की। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह एक दुर्लभ दृश्य है जो शायद ही कभी देखने को मिले।श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इस आयोजन ने देश के दो विभिन्न हिस्से के लोगों के बीच संस्कृति का आदान-प्रदान किया और इससे दोनों की संस्कृति में अनूठा संगम देखने को मिला।