वाराणसी

भगवान और भक्त का ये है प्रेम, लोग जी भर के नहलाएंगे और वो पड़ जाएंगे बीमार

अब शुरू होगा काशी में त्योहारों का मौसम, उससे पहले भगवान पड़ेंगे बीमार
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Updated: 21 Jun 2018, 5:38 PM IST
भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भैया बलभद्र
भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भैया बलभद्र

वाराणसी. सनातनी हिंदू संस्कृति में क्या गजब-गजब किंवदंतियां हैं। क्या क्या प्रचलन है। सब कुछ इस भारतीय माटी, यहां के मौसम के अनुकूल। यही वह धरती है जहां भगवान और भक्त के बीच ऐसा प्रेम दिखता है जो अन्यत्र कहीं नहीं दिखेगा। अब ऐसा भी दुनिया में कहां होता है कि भक्त भगवान को नहलाएंगे और इतना नहलाएंगे कि वह बीमार पड़ जाएंगे। एक पखवारे तक वह बीमार रहेंगे। इससे भी बड़ी बात यह कि बीमारी के दौरान जो दवा भगवान को दी जाएगी वह प्रसाद रूप में भक्त ग्रहण करेंगे। फिर वह स्वस्थ हो कर निकलेंगे सैर पर वह भी बहन और बड़े भाई के साथ। भक्त और भगवा के बीच का यह स्नेह बंधन अद्भुत है।

भक्त व भगवान के इस प्यार को दर्शान के लिए ही कहा गया, 'शेष महेश, गनेश, दिनेश, सुरेसहु जाहि निरंतर ध्यावे, ताहि अहिर की छोहरिया, छछिया भर छांछ पर नाच नचावे’ ऐसे है अपने सरल और सुहृदय वाले नाथो के नाथ जगन्नाथ जी।' हां हम बात कर रहे हैं भगवान जगन्नाथ की। वह भक्तों के कल्याणार्थ बीमार पड़ेंगे, 15 दिन तक उनका द्वार बंद रहेगा। भगवान को काढ़ा पिलाया जाएगा और स्वस्थ होने के बाद वह मौज करने निकलेंगे नगर भ्रमण पर। साथ होगीं बहन सुभद्रा और भईया बलभद्र।

अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर के पुजारी पंडित राधेश्याम पांडेय ने बताया कि 28 जून को भक्तों के प्रेम में भगवान जगन्नाथ ज्यादा स्नान कर बीमार पड़ेंगे। उसके बाद उनका कपाट पंद्रह दिनों के लिए बंद कर दिया जाएगा। इस दौरान वह भक्तों को दर्शन नहीं देंगे। शाम के समय उन्हें काढ़े का भोग लगाया जाएगा और वह भक्तों में वितरित किया जाएगा। भक्त प्रभु के स्वस्थ होने की कामना करेंगे और वह जैसे ही वह स्वस्थ होंगे। नगर भ्रमण पर निकल पड़ेंगे। उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ मंदिर में इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।


बता दें कि रथयात्रा मेला काशी के पर्वोत्सव श्रृंखला का पहला उत्सव है। इसके बाद गुरु पूर्णिमा और सावन की आहट मिलते ही सावनी मेला दस्तक देने लगेगा। फिर यह सिलसिला रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, पितृ पर्व, शारदीय नवरात्र, विजया दशमी, धनतेरस, दीपावली से होता हुआ कार्तिक पूर्णिमा को देव-दीपावली उत्सव के बाद विराम लेगा।

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