यूपी में बीजेपी के कमजोर होने स अपना दल व सुभासपा को मिल सकती अधिक सीट, लोकसभा चुनाव के पहले ही बढ़ा चुके हैं दबाव
वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में हुए उन्नाव कांड का खामियाजा बीजेपी को लंबे समय तक भुगतना पड़ेगा। सबसे अधिक दिक्कत पीएम नरेन्द्र मोदी को हो सकती है। लोकसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी सरकार सबसे कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है, ऐसे में उन्नाव कांड के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर को बचाने के आरोप के चलते सीएम योगी सरकार बैकफुट पर आ चुकी है, जिसका सीधा फायदा भगवा पार्टी के सहयोगी दल को होने वाला है।
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यूपी में बीजेपी ने अनुप्रिया पटेल की अपना दल व ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा के साथ मिल कर गठबंधन किया है। यूपी में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला हुआ है और सीएम योगी आदित्यनाथ के कमान संभाने के बाद से सहयोगी दलों से बीजेपी के रिश्ते खराब होते गये हैं। समय-समय पर अनुप्रिया पटेल व ओमप्रकाश राजभर ने सीएम योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। गठबंधन दलों को लेकर बीजेपी की स्थिति जब अधिक खराब हो गयी थी तो खुद ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को हस्तक्षेप करना पड़ा है इससे साफ हो जाता है कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या व डा. दिनेश शर्मा भी सहयोगी दलों के साथ सामंजस्य नहीं बना पा रहे हैं।
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उन्नाव कांड से सहयोगी दलों को होगा लाभ
पीएम नरेन्द्र मोदी के लिए लोकसभा चुनाव2019 बेहत महत्वपूर्ण है। उन्नाव कांड के चलते बीजेपी को बहुत नुकसान हुआ है जिस तरह से गैंगरेप के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बचाने का सीएम योगी पर आरोप लगा है उससे स्थिति बेहद खराब हो गयी है। यूपी में बीजेपी कमजोर होने लगी है, ऐसे में बीजेपी किसी हाल में सहयोगी दलों को छोडऩे का जोखिम नहीं उठा सकती है। लोकसभा चुनाव 2014 की बात की जाये तो बीजेपी व अपना दल ने मिल कर लड़ा था उस समय अपना दल को दो सीट दी गयी थी। मिर्जापुर से अनुप्रिया पटेल व प्रतापगढ़ से कुवंर हरिवंश सिंह ने चुनाव जीता है। लोकसभा चुनाव 2019 में भी बीजेपी के अपना दल व सुभासपा के साथ मिल कर लडऩे की संभावना है। इस बार अपना दल ने बीजेपी से अधिक लोकसभा सीट मांगने की तैयारी की है जबकि ओमप्रकाश राजभर भी पांच सीट मांग रहे हैं। जिस तरह से बीजेपी कमजोर हो रही है उससे सहयोगी दलों को अधिक से अधिक सीट देना भगवा पार्टी की विवशता हो जायेगी। कुल मिला कर कहा जाये तो उन्नाव कांड के बाद बीजेपी के पास इतनी ताकत नहीं बची है कि वह सहयोगी दलों की बात को नकारे।
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