वाराणसी

घटना के एक सप्ताह बाद भी पुलिस ने नहीं दर्ज की FIR, दलित महिला ने बीच सड़क रोकी वाराणसी पुलिस कमिश्नर की कार

Varanasi latest news: जंसा थाना क्षेत्र की एक दलित महिला ने आरोप लगाया है कि उसके और उसकी बेटी के साथ मारपीट की गई और जब वह थाने पहुंची तो उसे मेडिकल और एफआईआर दर्ज करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया।
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Jun 30, 2026
Allocation against varamasi police
Pc-Patrika

Varanasi Crime News: वाराणसीके जंसा थाना क्षेत्र से एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है, जहां पीड़ित पक्ष की एफआईआर दर्ज नहीं करने के बाद पीड़ित पक्ष के परिवार जनों ने पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल की कार का रास्ता रोक लिया और न्याय की गुहार लगाई है। बीच सड़क पुलिस कमिश्नर का रास्ता रोके जाने के बाद पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। इसके बाद पीड़ित पक्ष को पुलिस कमिश्नर ने अपने दफ्तर में बुलाया और उनकी फरियाद सुनी।

जानकारी के मुताबिक, अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस खुद के सवालों से गिर गई है। यहां जंसा थाना क्षेत्र की एक दलित महिला ने आरोप लगाया है कि उसके और उसकी बेटी के साथ मारपीट की गई और जब वह थाने पहुंची तो उसे मेडिकल और एफआईआर दर्ज करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया। महिला ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने कहा है कि मुआयना करने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काटने के बाद अंत में दलित महिला ने पूरे परिवार के साथ पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल की कार को रोक लिया और अपनी व्यथा सुनाई।

23 जून को की गई मारपीट

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल को दिए गए प्रार्थना पत्र मे पीड़िता ने बताया कि उसके पति गुजरात में रहकर मजदूरी करते हैं और वह अपने घर में 18 वर्षीय बेटी और बेटे के साथ रहती है। पीड़िता का आरोप है कि गांव के ही कुछ दबंग लोग जिनमें गिरधारी पटेल, बिहारी पटेल, पप्पू पटेल, महेंद्र पटेल, रेखा और नीलम शामिल हैं, उसे और उसके बच्चों को आए दिन गालियां देते रहते हैं और प्रताड़ित करते हैं। दलित महिला ने आरोप लगाया है कि 23 जून की सुबह 11 बजे के आसपास आरोपियों ने जबरन उसके घर के सामने मड़ई रखकर रास्ता रोक दिया। वहीं, जब पीड़िता और उसके बच्चों ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उन्हें लाठी डंडों से पीट दिया।

पुलिस पर गंभीर आरोप

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि विपक्षीगणों ने उसके साड़ी और अंत:वस्त्र को भी खींच दिया, जिससे वह बुरी तरह से अपमानित हो गई। इसके साथ ही आरोपियों ने लाठी से मार कर उसका सर भी फोड़ दिया। पीड़िता का आरोप है कि उसकी बेटी का दाहिना हाथ भी तोड़ दिया गया और उसके भी कपड़े फाड़ दिए गए और बेटे को भी बेरहमी से मारा पीटा गया। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि इस बात की जानकारी डायल 112 के माध्यम से पुलिस को दी गई, जिसके बाद मौके पर रामेश्वर चौकी इंचार्ज और थाना अध्यक्ष पहुंचे, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय 'ऊपर से दबाव' होने की बात कहने लगे। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने कहा कि 14 दिन तक घटना का मुआयना किया जाएगा और 14 दिन बाद ही मेडिकल की कार्रवाई होगी।

क्या है पीड़िता की मांग

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि थाने पर जाने के बाद उसके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है और ऐसा लग रहा है कि पुलिस आरोपियों के साथ मिली हुई है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उसकी और उसकी बेटी की अब तक ना तो इलाज कराया गया और ना ही मेडिकल कराया गया है। ऐसे में पीड़िता ने पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि दोनों का इलाज कराया जाए और आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए। पीड़िता का आरोप है कि स्थानीय पुलिस की भूमिका काफी संदिग्ध है, इसको देखते हुए मामले की विवेचना एडीसीपी स्तर के अधिकारी या क्राइम ब्रांच से कराई जाए। इसके साथ ही परिवार की जान माल की सुरक्षा भी की जाए। वहीं, मामले में पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

Published on:
30 Jun 2026 04:53 pm
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