वाराणसी

चेतावनी बिंदु से सिर्फ एक मीटर नीचे गंगा का जलस्तर, घरों में घुसा पानी, काशी में शुरू हुआ पलायन

Varanasi flood: वाराणसी में गंगा और वरुणा नदी ने खतरनाक रूप लेना शुरू कर दिया है। गंगा अपनी चेतावनी बिंदु को पार करने पर उतारू है, जबकि वरुणा के जलस्तर में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है..
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Aug 23, 2026
Varanasi news
Pc-Patrika

Flood in Varanasi: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा और वरुणा नदी ने खतरनाक रूप लेना शुरू कर दिया है। गंगा अपनी चेतावनी बिंदु को पार करने पर उतारू है, जबकि वरुणा के जलस्तर में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आलम यह है कि लोग अब पलायन करना शुरू कर दिए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के बाद गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी जा रही है। सभी प्रमुख घाट डूब चुके हैं और घाट किनारे स्थापित मंदिरों में गंगा नदी का पानी भर चुका है। वहीं, सावन के मद्देनजर घाटों पर जल पुलिस और एनडीआरएफ का कड़ा पहरा है।

राहत कैंप का सहारा

वाराणसी में गंगा नदी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। रविवार की सुबह गंगा नदी का जलस्तर 69.23 मीटर दर्ज किया गया। वहीं, गंगा अपनी चेतावनी बिंदु (70.262) मीटर से केवल एक मीटर ही दूर है। बता दें कि गंगा नदी और वरुणा नदी में लगातार हो रही जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण निचले इलाकों में पानी भरना शुरू हो गया है। कई ऐसे स्थान हैं, जो जलमग्न हो चुके हैं और लोगों के घरों में पानी घुस चुका है। आलम यह है कि लोग अपना आशियाना छोड़कर राहत कैंपों की तरफ रुख कर रहे हैं। वहीं, लोगों को घरों से निकालने के लिए जल पुलिस और एनडीआरएफ की टुकड़ी को भी तैनात कर दिया गया है।

एक तरफ लोगों के घरों में पानी भर रहा है तो दूसरी तरफ सावन में काशी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रमुख घाटों पर एनडीआरएफ और जल पुलिस की तैनाती की गई है। जिला प्रशासन लगातार पब्लिक अनाउंस सिस्टम के माध्यम से लोगों को गहरे पानी में नहीं जाने को लेकर आगाह कर रहा है। वहीं, मणिकर्णिका घाट पर शवों का दाह छत पर किया जा रहा है, जबकि हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह गलियों में हो रहा है। गंगा ने काशी वासियों की मुसीबत को बढ़ा दिया है।

क्या बोले स्थानीय

गंगा के साथ वरुणा नदी भी उफान पर है। गंगा के पलट प्रवाह से सलारपुर, डिपो, दीनदयालपुर, नक्खी घाट के कई मोहल्ले में पानी भर चुका है। यहां करीब 50 से अधिक परिवार है जो अपना घर बार छोड़कर राहत शिविरों और रिश्तेदारों के यहां जा रहे हैं। नक्खी घाट के रहने वाले डब्लू ने बताया कि बाढ़ की चपेट में आने के कारण उनका परिवार पलायन कर चुका है, लेकिन सबसे ज्यादा डर चोरी का सता रहा है। ऐसे में परिवार का एक सदस्य छत पर रहकर घर की निगरानी कर रहा है।

वहीं, बबीता ने बताया कि प्रत्येक वर्ष जब गंगा का पलट प्रवाह होता है, इस दौरान वरुणा नदी उफान पर होती है। ऐसे में नक्खी घाट इलाके के सैकड़ो ऐसे मकान हैं, जिनमें पानी भर जाता है। उन्होंने बताया कि वरुणा कॉरिडोर का निर्माण किया गया है, लेकिन बाढ़ से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने किसी भी तरह से व्यवस्था नहीं की। आलम यह है कि प्रत्येक वर्ष वह अपना मकान छोड़कर राहत शिविरों में जाती हैं और वापस लौटने के बाद सिल्ट और पानी से घर की दीवारें और फर्नीचर समेत लकड़ी के समानों की बर्बादी हो जाती है।

Updated on:
23 Aug 2026 09:22 am
Published on:
23 Aug 2026 09:21 am
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