
Pc-Patrika
BHU Research News: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में करीब 70 साल से बंद पड़े पांच जर्जर बक्सों को खोला गया है। बताया जा रहा है कि इनमें इतिहास से जुड़े कई रहस्य छुपे हुए हैं। अब विश्वविद्यालय के पुरातत्व शोध की टीम इन बक्सों में मिले चीजों की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि इन बक्सों के मिलने से करीब 5 हजार साल पुराने रहस्यों से पर्दा उठ सकता है। इस पर रिसर्च करने के लिए टीम का भी गठन किया गया है। बताया जा रहा है कि इन बक्सों में 5 हजार साल पुरानी वस्तुओं के एनालॉग कैमरों की 10 हजार से अधिक निगेटिव, रील और ग्लास स्लाइड्स भी मिली है। देश के विभिन्न स्थान पर खुदाई के दौरान यह दुर्लभ वस्तु है मिली थी।
जानकारी के मुताबिक, बीएचयू की ओर से देश के 63 स्थान पर पुरातात्विक खुदाई कराई गई थी और उसके साक्ष्य और देश का राजश्री आध्यात्मिक इतिहास इन बक्सों के जरिए खुल सकता है। बताया जा रहा है कि निगेटिव में काशी के राजघाट समेत देश के कई हिस्सों से मिली दुर्लभ मूर्तियों की तस्वीर भी है। इनमें सबसे ज्यादा गौतम बुद्ध की प्राचीन प्रतिमा की फोटो मिली है। इसके साथ ही भगवान शंकर और भगवान विष्णु की तस्वीर भी मिली है। इसके अलावा अजंता एलोरा की गुफाओं की चित्रकला से लेकर काशी के राजघाट तक को इसमें देखा जा सकता है। इनमें देश के कई मंदिर अ स्तूप इत्यादि भी शामिल हैं।
इसके अलावा बक्सों में कई प्राचीन वस्तुएं भी मिली हैं। करीब 5 हजार साल पुराने चित्रित कला मृदभांड, हाथी के दांत और पत्थरों से बने औजार, दूसरी शताब्दी के सिक्के मुद्रांक और उन पर खुदी प्राचीनतम लिपियां भी बरामद हुई हैं। शोध टीम का मानना है कि इनमें से कुछ पत्थर और औजार 50 हजार से 1 लाख साल पुराने हैं। प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर महेश अहिरवार ने बताया कि जब उन्हें संदूक दिए गए तो उनकी स्थिति बेहद खराब थी और इनमें रखी गई सामग्री भी संरक्षण से दूर थी। अब इन ऐतिहासिक चीजों को व्यवस्थित तरीके से रखा जा रहा है और इस पर शोध किया जाएगा।
प्रोफेसर महेश प्रसाद अहिरवार के नेतृत्व में तीन रिसर्च टीमों का गठन किया गया है, जो इनके डॉक्यूमेंटेशन का काम कर रही हैं। प्रोफेसर अहिरवार ने बताया कि इन बक्सों में राजघाट में एक हजार से ज्यादा अभिलेख, मोहरे, सीलिंग मिली हैं। सिक्कों पर शब्द कुरेदे गए हैं, जिनका अभी पढ़ा जाना बाकी है। उन्होंने बताया कि यह सिक्के इतने छोटे हैं जैसे लग रहा हो कि इन पर सुई की नोक से लिखा गया है। उन्होंने बताया कि उस कल की तकनीक बहुत ही सूक्ष्म स्तर पर काम करती थी। उन्होंने बताया कि इन सिक्कों की मदद से 4 हजार साल पुरानी संस्कृति अर्थव्यवस्था और सभ्यता को समझने में मदद मिलेगी।
Updated on:
21 Aug 2026 01:43 pm
Published on:
21 Aug 2026 01:43 pm
