
वाराणसी. ईडी ने रिवर फ्रंट घोटाले के आरोप में सिंचाई विभागके आठ इंजीनियरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है जिसके बाद से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। रिवर फ्रंट की तरह से वरुणा कॉरीडोर के निर्माण में भी जमकर खेल हुआ है जांच की आच अब यहां तक पहुंच सकती है। बिना काम कराये ही अधिकारियों ने बजट की बंदरबाट कर ली थी। वरुणा कॉरीडोर को लेकर यूपी सरकार की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि दागियों के बचाने में बीजेपी के नेता व अधिकारी भी जुट गये हैं।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने 31 मार्च तक काम खत्म करने का सख्त निर्देश दिया था। साथ ही चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि निर्धारित समय तक काम खत्म नहीं होता है तो कार्रवाई की जायेगी। दो दिन बाद सीएम योगी की दी गयी मियाद भी खत्म हो जायेगी। खास बात है कि यूपी में बीजेपी की सरकार आने के बाद कई मंत्री व विधायकों ने कॉरीडोर का निरीक्षण करके फटकार लगायी थी उसके बाद से ऐसा क्या हो गया कि कोई अब यहां पर झांकने तक नहीं जाता है। पिछले साल होली के दिन यहां पर आग लग गयी थी आग लगने के कारण नुकसान व जिम्मेदार लोगों को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की गयी है।
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अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट पर चढ़ चुका है राजनीति का रंग
सपा सरकार के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट पर राजनीति का रंग चढ़ चुका है। वरुणा कॉरीडोर का मुख्य उद्देश्य वरुणा नदी को बचाना है। सपा सरकार के कार्यकाल के अंतिम समय में नियमों को ताख पर रख कर वरुणा कॉरीडोर का निर्माण कराया जाने लगा। सरकार जाते ही वरुणा कॉरीडोर के निर्माण पर ग्रहण लग गया। सीएम योगी सरकार ने इस योजना को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है इसके बाद भी काम तेज नहीं हो पाया। वर्तमान समय की बात की जाये तो वरुणा नदी अधिकांश जगहों पर सूख गयी है और जहां पर पानी दिखता है वह सीवर का जल है। मंत्री व अधिकरियों के रिपोर्ट के आगे सीएम योगी सरकार भी फेल हो गयी है।
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