
वाराणसी. देश का एक रेस्टोरेंट ऐसा भी है, जहां का लजीज भोजन करना है तो आपके साथ किसी महिला का होना आवश्यक है। बिना महिला के इस रेस्टोरेंट में आपको प्रवेश नहीं मिलेगा। बेटियों को समॢपत देश के अनोखे रेस्टोरेंट में खाना बनाने से लेकर खाना खिलाने की सारी जिम्मेदारी महिलाओं की है। रेस्टोरेंट की सारी जिम्मेदारी गांव की कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को दी गयी है जो पारंपरिक परिधान के साथ भारतीयता को जिंदा रखते हुए शुद्ध देशी खाना खिलाती है।
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पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में खुला यह अनोखा रेस्टोरेंट अब लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगा है। डाफी में खुले बाटी चोखा रेस्टोरेंट का समय सुबह 10 से शाम छह बजे तक की निर्धारित है। ग्रामीण महिलाओं के आने-जाने की सुविधा को देखते हुए ही इतने कम समय के लिए रेस्त्रा खोला जाता है। यहां पर सिर्फ लंच मिल सकता है डिनर की व्यवस्था नहीं की गयी है। रेस्टोरेंट में पारंपरिकता के साथ आधुनिकता का संगम देखने को मिलता है। एक बार रेस्टोरेंट में प्रवेश कर जाते हैं तो लगता कि अपने गांव के घर में आ गये हैं। प्रवेश द्वार पर एवरेस्ट फतह करने वाली भारत की पहली महिला अरूणिमा सिन्हा की फोटो लगी है। प्रवेश द्वार पर ही मुनादी करायी गयी है कि बिना महिला के प्रवेश करना सख्त माना है। बाटी चोखा रेस्टोरेंट में जाते ही ग्रामीण वेशभूषा धारण किये हुए महिला मिलती है जो वहां पर घरेलू काम करने में व्यस्त रहती है। कोई महिला तुलसी की पूजा करते हुए मिल जायेगी तो कोई सब्जी काटते हुए दिखेगा। बाटी के लिए सतुआ पीसने से लेकर कुएं का पानी निकालने का काम भी इन्ही महिलाओं को है। रेस्टोरेंट में जब मॉर्डन लड़किया जाती है तो वह महिलाओं के कामकाज के तरीके से बेहद प्रभावित हो जाती है तो उनके साथ सेल्फी लिए बगैर वापस नहीं आती है। इससे मॉर्डन लड़कियों में भारतीयता के प्रति ललक बढ़ रही है।
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घर से निकली गांव की महिला, अब बढ़ रहा आत्मविश्वास
रेस्टोरेंट में काम करने के लिए गांव की महिला घर से निकली है और धीरे-धीरे इन महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ रहा है। रेस्टोरेंट की सुरक्षा का जिम्मा डाफी गांव की आशा देवी को मिला है जो हाथ में डंडा लिए ड्यूटी पर मुस्तैद मिल जायेगी। ममता, मंजू, आशा आदि महिलाएं गांव के पारंपरिक पोशाक में आपको खाना खिलाते मिल जायेगी। पानी पिलाने की जिम्मेदारी भी महिलाओं को मिली है। रेस्टोरेंट में हंडिया में बनी दावल, गांव स्टाइल में बनाये गये बाटी व चोखा आदि व्यंजन यही महिलाएं बनाती है। युवा कारोबारी सिद्धार्थ दुबे ने कहा कि हमारा उद्देश्य गांव की महिलाओं में आत्मविश्वास जगा कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए ही कम समय तक रेस्टोरेंट खोला जाता है। पीएम नरेन्द्र मोदी का संदेश समाज के सभी वर्ग तक पहुंचाना है।
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