
विदिशा. अनियमित दिनचर्या, तनाव भरी जिंदगी और शारीरिक श्रम की बहुत कमी के कारण डायबिटीज अब घर-घर की सदस्य बनती जा रही है। केवल विदिशा नगर के ही 15 हजार से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीडि़त हैं। रोजाना जिला चिकित्सालय सहित निजी पैथॉलॉजी लैब में करीब डेढ़-दो सौ लोग शुगर की जांच कराने पहुंचते हैं। यकीनन जागरूकता बढ़ी है, लेकिन बीमारी उससे भी ज्यादा बढ़ी है। विशेषज्ञों की मानें तो इस रोग का खात्मा संभव नहीं, लेकिन नियंत्रण मरीज के खुद के हाथों में है। शहर में 45 वर्ष से पैथॉलॉजी लैब संचालित करने वाले डॉ. वीपी मेहरा बताते हंैं कि करीब 15-20 वर्ष पहले मेरे पास डायबिटीज के 10-15 मरीज ही दिन में आते थे, जबकि उस समय जांच के लिए पैथॉलॉजी लैब भी कम थे। अब निजी पैथोलॉजी लैब की भरमार है, इसके बावजूद हर रोज 30-40 केस रोजाना जांच के लिए आते हैं। पहले जहां शहर में हर रोज अधिकतम 60-70 केस आते थे, वहीं अब इनकी संख्या शहर में करीब 150 से 200 तक हो गई है।
उपचार मरीज के हाथ में: डॉ. प्रदीप गुप्ता
डा यबिटोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप गुप्ता बताते हैं कि डायबिटीज बिना दर्द वाली बीमारी है। खून में शुगर की मात्रा का बढ़ जाना ही डायबिटीज है। इसका कोई स्थाई इलाज नहीं है। यह जीवन भर बनी रहती है, लेकिन अपनी दिनचर्या से इसे नियंत्रित कर खतरों से बचा जा सकता है। डॉ. गुप्ता कहते हैं कि खानपान पर नियंत्रण, नियमित व्यायाम, समय पर जांच, समय पर दवाओं के जरिए डायबिटीज को नियंत्रित रखा जा सकता है। ये सभी उपाय खुद मरीज के हाथ में ही हैं, यानी डायबिटीज का पूरा उपचार खुद मरीज के हाथ में है। डॉ. गुप्ता बताते हैं कि रोग बढ़ा है, लेकिन उसके साथ-साथ अब जागरूकता भी बढ़ी है। करीब 30-40 फीसदी लोग डॉक्टर के बताए बिना खुद ही शुगर की जांच कराने पहुंचते हैं।
आज डायबिटीज नियंत्रण शिविर
विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर 14 नवम्बर को माधव उद्यान में मधुमेह नियंत्रण शिविर आयोजित किया गया है। शिविर में जिला चिकित्सालय के डायबिटोलॉजिस्ट डॉ प्रदीप गुप्ता सुबह 7.30 बजे से रोगियों की नि:शुल्क ब्लड सुगर की जांच करेंगे और मधुमेह नियंत्रण संबंधी आवश्यक जानकारी देंगे। इसी तरह लायंस क्लब सम्राट द्वारा कोतवाली परिसर में सुबह 9 बजे से डायबिटीज पर कार्यशाला रखी गई है।
डायबिटीज: कुछ जरूरी बातें आपके लिए...
-40 फीसदी लोगों को ही पता कि उनको डायबिटीज है।
-टाइप 1 की डायबिटीज बच्चों और किशोरों में ज्यादा।
-टाइप 2 की डायबिटीज युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक।
-पुरुषों में डायबिटीज की शिकायत ज्यादा।
-मेनोपॉज के समय महिलाओं में भी डायबिटीज ज्यादा।
-डायबिटिक गर्भवती के गर्भ के शिशु में भी इस रोग के आनेकी आशंका ज्यादा।
-युवाओं में बाहरी खानपान, अनियमित दिनचर्या, व्यायाम की कमी और धूम्रपान तथा एल्कोहल के सेवन से डायबिटीज का खतरा ज्यादा।
यह हैं लक्षण
-बार-बार लघुशंका आना।
-सामान्य से अधिक लघुशंका।
-सामान्य से अधिक भूख लगना।
-सामान्य से अधिक प्यास लगना।
-अकारण वजन कम होना।
-थकान बनी रहना।
-आंखों से धुंधला दिखाई देना।
-घाव देरी से भरना।
-पैरों में झुनझुनी, सुन्न होना।
समझें कारण
-गलत खानपान।
-अनियमित दिनचर्या।
-तनावयुक्त जीवन।
-व्यायाम की कमी।
-आनुवांशिक कारण।
-बच्चों में जंक फूड के कारण।
यह हैं नुकसान
-हार्टअटैक का खतरा गुना ज्यादा
-किडनी फेल होने का खतरा
-लकवे का खतरा
-आंखों की रोशनी का जाना
-पैरों में गैंगरीन का खतरा
-घाव का जल्दी न भरना
ऐसे करें कंट्रोल
-खान पान का नियंत्रण।
-सुबह की सैर।
-नियमित व्यायाम।
-नियमित जांच।
-नियमित दवाओं का सेवन।