
Drug addiction: पांच राज्यों से आता है नशा (Photo Source - freepik)
Drug addiction: एमपी के विदिशा जिले में नशे का जाल लगातार गहराता जा रहा है। बीते ढाई वर्षों में नशे के ओवरडोज ने नौ लोगों की जान ले ली, जबकि पुलिस कार्रवाई में करीब 1.80 करोड़ रुपए का अवैध नशा पकड़ा गया है। चिंताजनक यह है कि नशे की गिरफ्त में युवा सबसे अधिक आ रहे हैं। विदिशा शहर तथा गंजबासौदा इसके प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जिले में मुख्य रूप से ब्राउन शुगर और गांजे की खपत हो रही है।
सिंथेटिक ड्रग्स का प्रचलन अभी सीमित है, लेकिन विशेषज्ञ इसे भविष्य के लिए खतरे की घंटी मान रहे हैं। नशीले पदार्थ सड़क मार्ग और ट्रेनों के जरिए जिले तक पहुंच रहे हैं, जिससे तस्करों का नेटवर्क लगातार सक्रिय बना हुआ है। पुलिस लगातार कार्रवाई का दावा कर रही है।
हाल ही में एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ कर उसे ध्वस्त किया गया। बीते ढाई वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के तहत 107 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें 156 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में कई महिलाएं भी शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल होने वाले 21 वाहन भी जब्त किए हैं। इनमें 14 बाइक, दो स्कूटी और पांच कार शामिल हैं। जब्त वाहनों की कीमत लाखों रुपए आंकी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशे के कारोबार पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। हालांकि बढ़ती मांग और आसान उपलब्धता चुनौती बनी हुई है। जबकि, सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए परिवार, समाज और प्रशासन को मिलकर जागरूकता की लड़ाई भी लडऩी होगी।
पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि जिले में गांजा ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ से लाया जा रहा है। स्मैक और अफीम राजस्थान के झालावाड़ एवं प्रतापगढ़ बॉर्डर, मंदसौर-नीमच, भोपाल, राजगढ़ तथा रायसेन के रास्ते पहुंच रही है। यह नशा विभिन्न मार्गों से होते हुए पैडलर्स के माध्यम से जिले के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है।
बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, जैन कॉलेज क्षेत्र, जतरापुरा, पूरनपुरा, करैयाखेड़ा रोड और उसके आसपास की कुछ कॉलोनियां, मुखर्जी नगर रोड, रामलीला चौराहा, गेहूंखेड़ी, हाईवे बायपास किनारे स्थित कुछ ढाबे, पुराना औद्योगिक क्षेत्र तथा शेरपुरा क्षेत्र अवैध नशे के प्रमुख अड्डे बन चुके हैं। इन स्थानों से पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही कई लोग यहां नशा करते हुए भी पकड़े गए हैं।
नशे का कारोबार अब गली-मोहल्लों से निकलकर डिजिटल दुनिया में पहुंच चुका है। विदिशा में करीब दो महीने पहले पुलिस ने ऐसे ही एक हाईटेक नेटवर्क का पर्दाफाश किया था, जिसमें 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें स्थानीय सप्लायर, पैडलर्स और राजस्थान में बैठे गिरोह के सरगना तक शामिल थे। जांच में सामने आया कि नशे की खरीद-फरोजत ऑनलाइन ऑर्डर और डिजिटल भुगतान के जरिए हो रही थी। पुलिस के अनुसार ग्राहक पहले ऑनलाइन ऑर्डर देता था और भुगतान भी डिजिटल माध्यम से करता था।
रकम मिलने की पुष्टि के बाद सप्लायर किसी भीड़भाड़ वाले या सुनसान स्थान पर नशीला पदार्थ छिपाकर रख देता था। बस स्टैंड के खंभों के नीचे, रेलवे स्टेशन के आसपास, सार्वजनिक शौचालयों या श्मशान घाट जैसे स्थानों का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद ग्राहक को लोकेशन भेज दी जाती थी और वह सामान उठा लेता था। इस पूरी प्रक्रिया में खरीदार और सप्लायर आमने-सामने तक नहीं आते थे। आसपास मौजूद होने के बावजूद दोनों एक-दूसरे की पहचान नहीं कर पाते थे।
विदिशा पुलिस ने नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। इसके माध्यम से बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई है। साथ ही अवैध नशे के कारोबार से अर्जित चल-अचल संपत्तियों को भी जब्त कर राजसात किया जा रहा है। पिछले वर्ष की एक कार्रवाई में न्यायालय के आदेश पर 15 लाख रुपए नकद राजसात किए गए थे। इससे नशे का कारोबार करने वालों को दोबारा इस गतिविधि में शामिल होने से रोका जा रहा है। पुलिस ने कुछ दिन पहले ही बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरी चैन का ध्वस्त किया था। आगे भी नशे पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी पुलिस कर रही है। डॉ. प्रशांत चौबे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, विदिशा
नशे की बढ़ती समस्या के बीच नशा मुक्ति केंद्रों की प्रभावशीलता भी सवालों के घेरे में है। शहर और आसपास संचालित केंद्रों से अब तक ऐसे उल्लेखनीय उदाहरण सामने नहीं आए हैं, जिनमें नशे की गिरफ्त से बाहर निकलकर युवाओं ने पूरी तरह सामान्य जीवन की ओर वापसी की हो। उल्टा, दो महीने पहले नशा छोडऩे की उम्मीद लेकर एक केंद्र में भर्ती हुए युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस मामले की जांच अभी भी पुलिस कर रही है।
नशे की लत से जूझ रहे कई युवाओं को इलाज के लिए भोपाल, इंदौर और जबलपुर के नशा मुक्ति केंद्रों में भेजा जा रहा है। पांच दिन पहले कोतवाली क्षेत्र में ओवरडोज से जान गंवाने वाले 26 वर्षीय युवक के पिता ने भी सवाल उठाए। आरोप था कि पुलिस को नशे के ठिकानों की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। युवक तीन साल से नशे की गिरफ्तमें था। उसे नशा मुक्ति केंद्र भी भेजा गया, लेकिन लत नहीं छूट सकी और अंतत: उसकी मौत हो गई।
Published on:
18 Jun 2026 05:47 pm
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