इलाज में बिक गए जेवर, गिरवी रखा गई जमीन
विदिशा। उपचार संबंधी शासन की विभिन्न योजनाओं के बाद भी एक परिवार अपनी बच्ची के इलाज के लिए परेशान है। बच्ची को जमीन पर छोड़ो तो वह जमीन पर अपना सिर पटकने लगती है। इसके कारण माता-पिता को उसे हमेशा अपनी गोद में बैठाए रखना पड़ता है। ताकि बच्ची जमीन पर सिर न मार ले। परिवार वालों को कहना है कि अभी यह छोटी है तो गोद में बिठाना आसान है। जब यह बड़ी होगी, तब पता नहीं क्या होगा।
शमशाबाद के ग्राम बरखेड़ा निवासी विनोद शर्मा और पत्नी कृष्णाबाई बच्ची की इस बीमारी से परेशान है। यह दोनों शनिवार को अपनी 5 वर्ष की पुत्री वैष्णवी के उपचार के लिए मदद मांगने कलेक्टे्रट आए थे। विनोद शर्मा का कहना है कि तीन पुत्रों में वैष्णवी सबसे छोटी है। वह जन्म के तीन वर्ष तक ठीक रही। इसके बाद दो वर्ष से अजीब बीमारी की चपेट में है। वह चलते-चलते गिर जाती और जमीन पर अपना सिर पटकती है। भोपाल में कई वरिष्ठ चिकित्सकों से उपचार कराया लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।
बिक गए जेवर गिरवी रखी जमीन
विनोद का कहना है कि पुत्री के इलाज में अब तक करीब चार लाख रुपए खर्च कर चुके। इसके लिए पत्नी के जेवर बेंचे और जमीन गिरवी रखना पड़ी है। अब मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण मुश्किल हो रहा। बच्चों की पढ़ाई और बच्ची का इलाज सभी कुछ संकट में आ गया है। उसका कहना है कि मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में शिकायत की, तहसील में भी आवेदन दिए पर कुछ नहीं हो पा रहा। वह यहां कलेक्टर से मिलने आया था, लेकिन कलेक्टर के न होने पर उसे वापस लौटना पड़ा।
बच्ची को मानसिक बीमारी हो सकती है। जांच के बाद सही स्थिति सामने आ पाएगी। अगर वह जिला अस्पताल आ जाए तो बच्ची की जांच कर शासन की योजनांतर्गत उसका उचित इलाज जहां भी संभव होगा वहां कराया जा सकता है।
डॉ. एमके जैन, शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल