
Vidisha news: मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अब इलाज के साथ साथ मरीजों की पूरी हिस्ट्री डिजिटल होगी। डॉक्टर मरीज को देखते ही उसका डेटा टेबलेट और कंप्यूटर के जरिए ऑनलाइन फीड करेंगे। इससे पर्ची बनवाने, डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने की लंबी कतारों से मरीजों को निजात मिलेगी और पेपरलेस इलाज को बढ़ावा मिलेगा। सरकारी अस्पतालों में ओपीडी की भीड़ किसी से छुपी नहीं है। एक पर्ची के लिए घंटों लाइन, फिर डॉक्टर के पास नंबर का इंतजार और अंत में दवा काउंटर पर फिर कतार।
इसी जद्दोजहद को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत यह नया प्रयोग कर रहा है। इस नई व्यवस्था का ट्रायल विदिशा के अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और जिले के सभी सिविल हॉस्पिटल, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर शुरू हो चुका है।
स्वास्थ्य विभाग ने इसे तीन चरणों में लागू करने की योजना बनाई है। पहला फेज 15 से 25 अगस्त इस दौरान डॉक्टर आभा आईडी में मरीज का डेटा टैबलेट के जरिए ऑनलाइन कर रहे हैं। फिलहाल स्टाफ को ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह से काम करना पड़ रहा है और दवा के लिए मरीजों को पर्ची लेकर ही जाना पड़ रहा है। सितंबर-अक्टूबर में दूसरा व तीसरा फेज आएगा। पहले फेज की कमियों को दूर कर दूसरा और तीसरा ट्रायल किया जाएगा। सॉफ्टवेयर, सर्वर और नेटवर्क की खामियों को ठीक किया जाएगा। और मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में एक साथ लागू कर दिया जाएगा।
पर्ची का झंझट खत्मः एक बार आभा आईडी बनी तो बार-बार पर्ची नहीं बनवानी पड़ेगी।
हिस्ट्री एक क्लिक परः अगली बार किसी भी जिले के सरकारी अस्पताल में जाने पर डॉक्टर को मरीज की पुरानी बीमारी, जांच और दवाओं की पूरी हिस्ट्री मिल जाएगी।
पारदर्शिताः दवाओं के स्टॉक और डॉक्टरों की पर्ची का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा।
मेडिकल कॉलेज में ट्रायल के लिए 10 टेबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। पहले चरण में मेडिसिन, साइकेट्री (मनोरोग) और डर्मेटोलॉजी (त्वचा रोग) विभाग में इसे आजमाया जा रहा है। आभा आईडी के जरिए मरीज का डेटा ऑनलाइन किया जा रहा है। विभाग के निर्देश पर 1 नवंबर तक सभी कमियों को दूर कर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।- डॉ. अविनाश लाघवे, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज