गांधीजी की 150वीं जयंती समारोह पखवाड़े के तहत अनूठी पहल
विदिशा. महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर जिले के 150 समस्यामूलक ग्रामों को पेयजल संकट से मुक्त करने और उनमें जलापूर्ति सुनिश्चित कराने पीएचई ने अनूठी पहल की है। जिले के ऐसे ग्रामों को पीएचई के कार्यपालन यंत्री से लेकर हैंडपम्प टेक्नीशियन तक गोद लेंगे और उनमें ग्रामीणों को जागरुक कर न सिर्फ पेयजल प्रदाय में आ रही दिक्कतों को दूर करेंगे, बल्कि अधिक से अधिक ग्रामीणों को नल जल योजनाओं से जोडऩे का भी प्रयास करेंगे।
गांधीजी की 150वीं जयंती समारोह पखवाड़े के तहत आयोजित विभागीय मैदानी शासकीय सेवकों के उन्मुखीकरण के लिए पीएचई ने कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में पीएचई के अनुविभागीय अधिकारियों, उपयंत्रियों, रसायनज्ञ, हैंडपम्प तकनीशियन, जिला स्तरीय समन्वयक और विकासखंड समन्वयकों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए कार्यपालन यंत्री एसके जैन ने कहा कि शासकीय योजनाओं के प्रति ग्रामीणों में स्वामित्व का भाव जगाना बहुत जरूरी है, तभी वे किसी योजना को अपनाएंगे।
जिले में 310 नल-जल योजनाएं हैं, इनमेें से कोई कभी तो कोई कभी छोटी-मोटी खामियों या व्यवधान के कारण बंद पड़ी रहती हैं और हमारा पूरा वक्त इन्हीं में जाया होता रहता है। इसलिए गांधीजी की 150 वीं जयंती वर्ष में पर हम जिले के समस्यामूलक 150 ग्रामों की नलजल योजनाओं को गोद लेने का संकल्प ले रहे हैं। इन ग्रामों में 134 गांव ऐसे हैं जिनमें ओवरहेड पानी की टंकियां हैं,जबकि शेष 16 गांव जटिल समस्या वाले हैं। ऐसे सभी ग्रामों को अधिकारी-कर्मचारी स्वे'छा से गोद लेकर उनमें जलापूर्ति नियमित करने और अधिकाधिक ग्रामीणों को इससे जोडऩे के लिए पूरे समर्पण से काम करेंगे।
संकल्प पूरा करने बनेंगी समितियां
कार्यपालन यंत्री जैन ने बताया कि 150 गांव को गोद लेने के संकल्प को पूरा करने के लिए विभिन्न समितियांं बनाई गई हैं, इनमें नवाचार समिति, जल परीक्षण समिति, प्रचार-प्रसार समिति, जलमित्र समिति, ग्राम पेयजल उपसमिति, तकनीकी समिति, समन्वय समिति आदि प्रमुख हैं। इन सबके माध्यम से ही ग्रामों को जल संकट से मुक्त करने का प्रयास किया जाएगा।
एक वर्ष तक चलेगी व्यवस्था
कार्यपालन यंत्री जैन ने खुद हर ब्लाक के एक-एक गांव को गोद लेने का संकल्प लिया, जबकि हर अनुविभागीय अधिकारी को 2-4 गांव गोद लेने को कहा। इसी तरह सब इंजीनियर, जिला स्तरीय समन्वयक, ब्लॉक स्तरीय समन्वयक और हैंडपम्प मैकेनिक भी एक-एक गांव गोद लेकर वहां की जलापूर्ति में आ रही कठिनाइयों को दूर करेंगे। यह व्यवस्था एक वर्ष तक चलेगी।
मैदानी अमले को दी सीख
समस्यामूलक गांव में पानी के विकल्प तलाशें।
गांव की छोटी-मोटी समस्याएं हल कराने में पहल करें।
ग्रामीणों को अहसास कराएं कि यह सुविधा उन्हीं के लिए है।
ग्रामीणों के सहयोग से ही समस्या हल करने का प्रयास करें।
अधिक से अधिक ग्रामीणों को नलजल योजना से जोड़ें।
छोटी-छोटी खामियों के कारण समस्या को लंबित न छोड़ें।