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Vidisha news: ‘इकलौता भाई दुनिया छोड़ गया…’,रूस से आकर बिटिया ने दी बड़ी खुशी

Success Story: शिवानी ने कभी भी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। यही कारण है कि उन्होंने सफलता पाई है।
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विदिशा

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Astha Awasthi

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Updated: 9 Jul 2026, 4:27 PM IST

Shivani Raghuvanshi Success Story: शिवानी ने पा लिया मुकाम (Photo Source - Patrika)

Shivani Raghuvanshi Success Story: शिवानी ने पा लिया मुकाम (Photo Source - Patrika)

Shivani Raghuvanshi Success Story: कभी भाई के निधन का गहरा दर्द, कभी आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां, तो कभी भविष्य को लेकर उठते सवाल। इन सभी कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ ग्राम गुलाबगंज की बेटी शिवानी रघुवंशी ने साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

मेहनत और समर्पण का परिणाम

किसान कमल सिंह रघुवंशी की पुत्री शिवानी ने एफएमजीई-2026 की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उनकी उपलब्धि ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। एफएमजीई में देशभर से 37 हजार 448 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें केवल 4 हजार 635 परीक्षार्थी ही सफलता प्राप्त कर सके। ऐसे कठिन प्रतिस्पर्धी माहौल में शिवानी का चयन उनकी वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। आज परिवार के सभी लोग शिवानी की सफलता से बहुत खुश है।

बेटी अकेले विदेश जाकर कैसे करेगी...

शिवानी की सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी छिपी है। वर्ष 2019 में उन्होंने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन उसी वर्ष उनके इकलौते भाई अंकित रघुवंशी का असामयिक निधन हो गया। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। घर में टेंशन का माहौल छा गए। कुछ दिन बाद हालात ऐसे बने कि शिवानी की पढ़ाई बीच में ही रुकने की आशंका पैदा हो गई।

समाज में तरह- तरह की बातें होने लगीं कि बेटी अकेले विदेश जाकर पढ़ाई कैसे करेगी, लेकिन मां राधा रघुवंशी ने हर सवाल का जवाब अपने अटूट विश्वास से दिया। उन्होंने बेटी का मनोबल टूटने नहीं दिया और हर कदम पर उसका साथ निभाया। भारत में कॉलेज नहीं मिलने पर शिवानी ने रूस जाकर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की।

भाई के निधन के बाद नहीं छोड़ी पढ़ाई

विदेश में रहते हुए भाई की याद ही उनके संघर्ष की सबसे बड़ी प्रेरणा बनी रही। हर कठिन पल में उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और लगातार मेहनत करती रहीं। एफएमजीई परीक्षा में सफलता मिलने के बाद शिवानी ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं. बल्कि उनके दिवंगत भाई के सपने और माता-पिता के त्याग का सम्मान है।

उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि संकल्प मजबूत हो और परिवार का विश्वास साथ हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकतीं। आज शिवानी ने अपनी उपलब्धि से न केवल परिवार का मान बढाया है, बल्कि क्षेत्र की बेटियों के लिए भी नई प्रेरणा की मिसाल कायम की है।