विदिशा

नदी में हजारों प्रतिमाएं विसर्जित, फैली गंदगी

नाममात्र को हुआ जानकीकुण्ड में विसर्जन, प्रशासन हुआ फेल
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Updated: 25 Sep 2018, 12:11 PM IST
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विदिशा. तीन-चार वर्ष से निरंतर इसी बात को लेकर विवाद हो रहा है कि प्रतिमाओं का विसर्जन कहां हो? नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुसार नदी-तालाबों में प्रतिमा विसर्जन से होने वाले भारी प्रदूषण के कारण विसर्जन नहीं किया जा सकता। ऐसे में विसर्जन कुण्ड की जरूरत है, जो विसर्जन कुण्ड नगरपालिका ने बनवाया है, उसमें गंदा पानी आने की शिकायत पर सनातनश्री हिन्दू उत्सव समिति ने विसर्जन से इंकार किया है।

ये भी एक साल पुरानी बात हो गई, लेकिन साल भर बीतने के बाद भी विसर्जन कुण्ड की समस्या का हल प्रशासन और नगरपालिका नहीं निकाल पाई। नतीजा साफ है, एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद नगर की हजारों छोटी-बड़ी गणेश प्रतिमाओं का बेतवा में ही विजर्सन हुआ। नदी में तैरती पीओपी की प्रतिमाएं और घाटों और बीच में पड़े प्रतिमाओं के ढांचे प्रशासन की उदासीनता की गवाही दे रहे हैं।

डोल ग्यारस पर भी अधिकांश गणेश प्रतिमाएं बेतवा तट पर ही विसर्जित हुईं थीं। बेतवा उत्थान समिति ने विसर्जन का विकल्प निकालने एसडीएम को ज्ञापन दिया था, इस पर एसडीएम के बोल थे कि-जानकीकुण्ड में ही विसर्जन कराएंगे। लेकिन बिना किसी चर्चा और बिना किसी बैठक के एसडीएम के इन बोलों का कहीं कोई असर नहीं होना था, तो नहीं हुआ।

अनंत चतुर्दशी रविवार को सुबह 11 बजे से दूसरे दिन सोमवार के दोपहर 2 बजे तक गणेश झांकियांं का विसर्जन बेतवा के विभिन्न घाटों पर होता रहा। सुबह तक नदी की धार और घाटोंं पर बड़ी संख्या में प्रतिमाओं के ढांचों का ढेर था। सुबह बेतवा उत्थान समिति के सदस्यों और श्रमदानियों ने काफी सफाई का प्रयास किया, ढांचों को नदी से निकालकर किनारे भी किया, लेकिन चंद लोगों के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे थे। प्रशासनिक अकर्मण्यता से समय रहते विसर्जन कुण्ड का मसला न सुलझाए जाने से बने ये हालात बने। अब इन 15 दिनों में भी हल नहीं निकला तो दुर्गाेत्सव विसर्जन में भी यही हालात बनेंगे।

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25 Sep 2018, 12:11 PM IST
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