मध्य प्रदेश में एक गांव ऐसा भी हैं, जहां विजयदशमी के अवसर पर रावण का पुतला दहन करना तो दूर उसकी पूजा अचर्ना की जाती है।
बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में हर साल देशभर में मनाए जाने वाले विजयदशमी पर्व पर लंकापति रावण के पुतला दहन किया जाता है। भारते में ये परंपरा हजारों सालों से यथावथ मनाई जाती आ रही है। देशभर में हजारों वर्षों से मनाई जाती आ रही इस परंपरा के विपरीत मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक गांव ऐसा भी हैं, जहां खासतौर पर विजयदशमी के अवसर पर रावण के पुतले का दहन करना तो दूर की बात उसकी पूजा अचर्ना की जाती है। जिले के अंतर्गत आने वाले एक गांव के लोग भी सेकड़ों सालों से यहां रावण की पूजा करते आ रहे हैं।
विदिशा जिले की नटेरन तहसील के अंतर्गत आने वाले इस गांव के लोगों में रावण के प्रति भक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों ने हजारों साल पहले ही इस ग्राम का नाम रावण गांव रखा हुआ है। इसी गांव में रावण का एक मंदिर भी है, जिसे अति प्राचीन कहा जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव में किसी भी तरह के शुभ कार्य करने से पहले संबंधित व्यक्ति को रावण बाबा की पूजा कर उनका आशीर्वाद लेना आवश्यक होता है। ऐसी भी मान्यता है कि जो कोई भी रावण बाबा का आशीर्वाद लिए बिना कोई शुभ कार्य करता है तो वो उस कार्य में विफल हो जाता है।
यहां हर चीज पर लिखा दिखेगा 'जय लंकेश' स्लोगन
यही नहीं गांव की लगभग सभी गाड़ियों पर यहां के लोग 'जय लंकेश' स्लोगन भी लिखकर रखते हैं। यही स्लोगन गांव के कई मकानों पर लगी तख्तियों पर भी देखने को मिलता है। वहीं, अगर बात करें दशहरे के दिन की, इस विशेष दिन पर यहां के ग्रामीण रावण के मंदिर पहुंचकर में रावण की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। गांव में किसी के यहां शादी या त्यौहार होता है तो लोग माता पूजन के साथ रावण की भी पूजा करने मंदिर में जरूर जाते हैं।