पेट, पाचन और वजन से जुड़ी परेशानियों में उपवास या फास्टिंग एक कारगर उपाय है। फास्टिंग को लेकर पश्चिमी दुनिया में 5:2 की डाइट का फंडा मशहूर हुआ है
पेट, पाचन और वजन से जुड़ी परेशानियों में उपवास या फास्टिंग एक कारगर उपाय है। फास्टिंग को लेकर पश्चिमी दुनिया में 5:2 की डाइट का फंडा मशहूर हुआ है। इसमें दो दिन उपवास और पांच दिन सामान्य होते हैं। आप अपनी सुविधा से इस फास्टिंग को 6:1 या 4:3 में भी बदल सकते हैं। फास्ट वाले दिन आपको शरीर के अनुसार औसतन 2000 कैलोरी से कम आहार लेने की सलाह दी जाती है। साथ ही कभी भी 48 घंटों से ज्यादा फास्ट न करें।
कैसे काम करती है डाइट
इस डाइट में भी हर दूसरे दिन फास्ट करने की सिफारिश की जाती है। इसमें सप्ताह में दो दिन उपवास रखते हुए व्यक्ति विशेष की ऊर्जा ज़रूरत का मात्र २५ प्रतिशत के बराबर आहार लेने पर जोर दिया जाता है और बाकी के पांच दिन सामान्य आहार लेना होता है।
फायदे
इस तरह की फास्टिंग में लोगों को अपने खाने में भरपूर आजादी मिलती है और अन्य प्रचलित उपवासों की तुलना में इसमें बंधन कम से कम होते हैं। इस डाइट से भूख और उपवास दोनों की बीच संतुलन बनाते हुए अच्छी सेहत की ओर ध्यान दिया जाता है। एक दिन छोड़कर उपवास का तरीका लचीला है और इसकी आदत डालना आसान है।
कुछ शंकाएं
कुछ लोगों को यह तरीका अजीब लगा है क्योंकि इसमें शरीर के शुद्धीकरण पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। इसमें कैलोरी पर बंधन लगाया जाता है जो कुछ लोगों को अपने पसंदीदा खाने की चीजों को चुनने में समस्या पैदा करता है। इसमें लचीलापन तो है लेकिन वह सभी लोगों के लिए एक जैसी लागू नहीं होती क्योंकि खान-पान में विविधता बहुत है।
कौन है आविष्कारक
इस डाइट का श्रेय ब्रिटेन की लेखिका कैट हैरिसन को जाता है। कैट ने अपने फास्टिंग से फिटनेस को पाने में मिली सफलता को 5:2 डाइट नाम दिया है। कैट ने इस विषय पर एक किताब भी लिख डाली है।