अजब गजब

आज जहां भाइयों के राखी बांध रही होंगी बहनें, वहीं इस गांव में होगा ‘युद्घ’ जैसा माहौल

इसी गांव में स्थित है मां बाराही देवी का मंदिर। इस मंदिर में प्रतिवर्ष रक्षा बंधन के दिन पत्थर युद्ध का ऐसा उत्सव मनाया जाता है।
2 min read
Aug 26, 2018
celebration of raksha bandhan by pelting stone in uttarakhand
आज जहां भाइयों के राखी बांध रही होंगी बहनें, वहीं इस गांव में होगा 'युद्घ' जैसा माहौल

नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड में रक्षाबंधन के दिन ये अनोखा त्यौहार मनाया जाता है। यह राज्य पत्थर युद्ध के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। रक्षा बंधन के दिन मनाया जाने वाला यह ऐसा उत्सव है जिसमें लोग एक दूसरे पर पत्थर मारकर खून बहाते हैं। चंपावत जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर देवीधूरा गांव स्थित है। बता दें कि, इसी गांव में स्थित है मां बाराही देवी का मंदिर। इस मंदिर में प्रतिवर्ष रक्षा बंधन के दिन पत्थर युद्ध का ऐसा उत्सव मनाया जाता है जो हर व्यक्ति के लिए कौतूहल बन जाता है। यहां की स्थानीय भाषा में इसे अछ्वुत बग्वाल कहते हैं। बग्वाल यानी पत्थर यु़द्ध के साक्षी लाखों लोग होते हैं। मान्यता है कि बग्वाल तब तक खेली जाती है जब तक एक आदमी के बराबर खून नहीं बह जाता है।

Raksha Bandhan by
in uttarakhand" src="https://new-img.patrika.com/upload/2018/08/26/devidhura_3313571-m.jpg">

आपको जानकारी के लिए बता दें कि, हर साल रक्षा बंधन के मौके पर बग्वाल खेली जाती है। चार खामों और सात थोक के लोगों के मध्य खेली जाती है यह अछ्वुत बग्वाल। मान्यता है कि देवीधूरा में बग्वाल का यह खेल पौराणिक काल से खेला जा रहा है। आपको यह सुनकर हैरानी ज़रूर हुई होगी लेकिन इस 21 वीं सदी में भी पाषाण युद्ध किया जाता है। इस 'पाषाण युद्ध' को उत्सव मनाते समय लोग एक-दूसरे पर निशाना साधकर वीरों की टोली पर पत्थर बरसाते हैं, इन वीरों की जयकार और वीर रस के गीतों से गूंजता वातावरण, हवा में तैर रहे पत्थर ही पत्थर और उनकी मार से बचने के लिये हाथों में बांस के फर्रे लिए युद्ध करते वीर चारों तरफ नज़र आते हैं और यह बग्वाल तब तक खेली जाती है जब तक एक आदमी के बराबर खून न बह जाए।

Published on:
26 Aug 2018 03:35 pm