किम जोंग-उन सरकार ने पश्चिमी देशों का असर रोकने के लिए उत्तर कोरिया में कई मामूली चीजें बैन कर रखीं हैं। इनमें से एक है फोन कॉल। यहां इंटरनेशनल कॉल नहीं किया जा सकता। अगर कोई नागरिक ऐसा करने की गलती भी करता है तो उसे सरेआम गोलियों से भुनवा दिया जाता है।
उत्तर कोरिया कई सालों से उन कारणों से चर्चा में रहा है जो सकारात्मक से बहुत दूर हैं। किम जंग उन के शासन में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रति सरकार के दृष्टिकोण के कारण देश सुर्खियों में रहा है। उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच संकट, परमाणु कार्यक्रम और परीक्षण, और मानवाधिकारों और स्वतंत्रता के घोर उल्लंघन जैसे कई मुद्दे देश की प्रतिष्ठा के लिए सबसे आगे रहे हैं। इनमें से एक है अंतरराष्ट्रीय कॉल पर बैन। यानी की उत्तर कोरियाई नागरिक अंतरराष्ट्रीय कॉल नहीं कर सकते क्योंकि वहां इसे अपराध माना जाता है।
इंटरनेशनल कॉल करने वाले को मिलती है कड़ी सजा
उत्तर कोरिया की सरकार देश में संचार तकनीक के इस्तेमाल पर बहुत कड़ी नजर बना कर रखी हुई है। कई रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि उत्तर कोरियाई सरकार देश में संचार के पूर्ण नियंत्रण को एक ऐसे हथियार के रूप में देखती है जिसके द्वारा वे लोगों की आवाज़ को दबा सकते हैं। अगर नॉर्थ कोरिया का कोई नागरिक इंटरनेशनल कॉल करने की कोशिश करता भी दिखे तो उसे सख्त सजा मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय कॉल करने का लगा आरोप, सरेआम मार दी गोली
एक रिपोर्टों के अनुसार, 2007 में एक उत्तरी कोरियाई कारखाने के मालिक को 150,000 लोगों के सामने फायरिंग दस्ते द्वारा मार डाला गया था, क्योंकि उस पर कारखाने के तहखाने में स्थापित 13 फोन पर अंतरराष्ट्रीय कॉल करने का आरोप लगाया गया था।
30 लाख से ज्यादा लोग करते हैं फोन इस्तेमाल
उत्तर कोरिया में सेल फोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या 30 लाख से कुछ ही ऊपर है। वहां की दो करोड़ 50 लाख की आबादी के हिसाब से 10 में से एक ही आदमी के पास मोबाइल है। वहीं, उत्तर कोरिया में एक लोकप्रिय मोबाइल फोन सेवा है जो ग्राहकों को सेवा प्रदान करती है। लेकिन इस नेटवर्क पर अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल की अनुमति नहीं है क्योंकि यह केवल स्थानीय कॉल तक ही सीमित है।
केवल कुछ लोगों को है इंटरनेट इस्तेमाल करने की अनुमति
उत्तर कोरिया का इकलौता मोबाइल कम्युनिकेशन नेटवर्क 'कोरियो लिंक' है। कोरियो लिंक को मिस्र की टेलिकॉम कंपनी 'ओ रासकॉम' चलाती है। मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वाले ज़्यादातर लोग राजधानी प्योंगयांग में ही रहते हैं। वहीं, यहां केवल कुछ चुनिंदा नागरिकों और विदेशियों को ही इंटरनेट का उपयोग करने की अनुमति है। हालाँकि, कुछ उत्तर कोरियाई लोगों के पास एक बंद नेटवर्क तक पहुंच है जो केवल घरेलू वेबसाइटों और ईमेल सेवाओं से जुड़ सकता है, जिन पर सरकार द्वारा भी कड़ी निगरानी रखी जाती है।
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