जब भी मंदिर में प्रवेश करते है कि हम अपने चप्पल और जूते बाहर ही निकालकर जाते है। लेकिन आज आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जहां पर भगवान को चप्पल और सैंडल चढ़ाते है। यह पढ़कर आपको आश्चर्य होगा लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐसा मंदिर है।
जब भी मंदिर में प्रवेश करते है कि हम अपने चप्पल और जूते बाहर ही निकालकर जाते है। लेकिन आज आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जहां पर भगवान को चप्पल और सैंडल चढ़ाते है। यह पढ़कर आपको आश्चर्य होगा लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐसा मंदिर है। एक पहाड़ी पर इस मंदिर में श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने के बाद मांग दुर्गा कों चप्पलें चढ़ाते है। जीजी बाई (Jiji bai ka mandir) के नाम मशहूर इस मंदिर की यह अनोखी परंपरा सालों से चली आ रही है।
सिंगापुर और पेरिस आई है चप्पल
भोपाल के कोलार इलाके में एक छोटी सी पहाड़ी पर बना मां दुर्गा का सिद्धदात्री पहाड़ावाला मंदिर है। लोग इस मंदिर को जीजी बाई का मंदिर भी कहते हैं। बताया जाता है कि अशोकनगर से रहने आए ओम प्रकाश महाराज ने मूर्ति स्थापना के साथ शिव-पार्वती विवाह कराया था और खुद कन्यादान किया था। तब से वे मां सिद्धदात्री को अपनी बेटी मानकर पूजा करते हैं और आम लोगों की तरह बेटी के हर लाढ़-चाव पूरे करते हैं। कुछ श्रद्धालु विदेश में बस गए है। कभी सिंगापुर तो कभी पेरिस से उनके लिए चप्पल भिजवाते है। एक दिन चप्पल चढ़ाने के बाद पूजारी इनको बांट देते है।
दो तीन घंटे में बदलते है कपड़े
ओम प्रकाश ने कहा कि लोग यहां अपनी मन्नतें मांगते हैं और पूरी होने के बाद नई चप्पल चढ़ाते हैं। श्रद्धालु चप्पलों के साथ गर्मी में चश्मा, टोपी और घड़ी भी चढ़ाई जाती है। उनका कहना है कि वह बेटी की तरह दुर्गा जी की देखभाल होती है। कई बार हमें आभास होता है कि देवी उन्हें पहनाए गए कपड़ोंं से खुश नहीं हैं तो दो-तीन घंटों में ही कपड़े बदलने पड़ते हैं।