जानें आमों की मलिका नूरजहां के बारे में अफगानिस्तानी मूल की आम की इस प्रजाति है दुर्लभ विशेषज्ञों की मानें तो इस बार मौसम है मेहरबान
नई दिल्ली। हर साल गर्मियों का इंतज़ार इसलिए रहता है ताकि आम खाने को मिल सकें। बच्चे हों या बूढ़े हर किसी को फलों के राजा आम से एक खास लगाव होता है। यूं तो भारत में आम की कई प्रजातियां हैं जिनकी अलग-अलग खासियत है और अलग-अलग स्वाद। आज हम आपको आमों की मलिका नूरजहां के बारे में बताएंगे। पिछले साल आमों की मलिका नूरजहां ( Noor Jahan Mango ) की फसल इल्लियों की वजह से बर्बाद हो गई थी। लेकिन जो इस आम के मुरीद हैं उन्हें इस साल यह दुर्लभ आम खाने को मिल सकता है। अफगानिस्तानी मूल के आम की इस प्रजाति के गिने चुने पेड़ ही हैं।
मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ही आम की यह दुर्लभ प्रजाति पाई जाती है। इस प्रजाति का एक आम तकरीबन एक फुट तक लम्बा हो सकता है। इस आम के शकीन बताते हैं कि इसकी एक गुठली का वज़न करीब 150 से 200 ग्राम के बीच हो सकता है। खास बात यह है कि इस आम के शौकीन लोग आम की बुकिंग तब ही कर लेते हैं जब वह डाल पर लटककर पक रहे होते हैं। डिमांड बढ़ने पर इस आम के एक फल की कीमत 500 रुपए तक पहुंच जाती है। इसकी खेती के विशेषज्ञों की मानें तो इस बार मौसम खासा मेहरबान है।
जानकारों की मानें तो पिछले एक दशक के दौरान मानसूनी बारिश में देरी, अल्पवर्षा, अतिवर्षा और आबो-हवा के अन्य उतार-चढ़ावों के कारण नूरजहां के फलों का वजन लगातार घटता जा रहा है। लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन की वजह से इस दुर्लभ किस्म के वजूद पर संकट भी मंडरा रहा है। लेकिन इस बार नूरजहां के मुरीद लोग इस दुर्लभ आम का मज़ा ले सकते हैं।