वाइल्ड लाइफ साइंस एंड कंजर्वेशन सेंटर ( Wildlife Science and Conservation Center ) और ब्रिटिश ट्रस्ट ऑफ ऑर्निथोलॉजी ( British Belief for Ornithology ) के तहत मंगोलियन वैज्ञानिकों ने 20 से ज्यादा पक्षियों के अप्रवास के दौरान उनकी दिनचर्या को जानने के लिए मंगोलियन कुकू प्रोजेक्ट ( Mongolian Cuckoo Project ) शुरू किया है।
नई दिल्ली। वैज्ञानिक पक्षियों के अप्रवास के दौरान रूट, परेशानियां, व्यवहार और उनकी दिनचर्या को जानने के लिए काम कर रहे हैं। इसके लिए वैज्ञानिकों ने पक्षियों के शरीर पर सैटेलाइट टैग ( Satellite Tag ) लगाए, ताकि उनकी लोकेशन पता लगाई जा सके।
इन पक्षियों को टैग ( Tag ) लगाकर उड़ने के लिए छोड़ा गया था। एक उपग्रह टैग का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों ने एक कोयल ( Cuckoo ) की खास निगरानी। इस दौरान कोयल ने 12,000 किलोमीटर से अधिक का लंबा सफर तय किया। जो कि वाकई अद्भभुत है।
ओनोन ( Onon ) ने अपने इस सफर के दौरान हिंद महासागर की 1000 किलोमीटर की सीमा को पार कर किया, इतने लंबे सफर में कोयल की उड़ने की औसत गति 60 किमी / घंटा रही। जिन पक्षियों पर ये सैटेलाइट टैग लगाए गए उन 5 पक्षियों में से, ओनोन एक है जिसे अपनी यात्रा को इस आश्चर्यजनक तरीके से पूरा किया।
मंगोलियन कुकू प्रोजेक्ट के तहत उड़ान भरने वाले इस परिंदे ने केवल दो सप्ताह में 10,000 किमी की उड़ान भरी। मंगोलिया के वाइल्ड लाइफ साइंस एंड कंजर्वेशन सेंटर और ब्रिटिश ट्रस्ट ऑफ ऑर्निथोलॉजी के तहत मंगोलियन वैज्ञानिकों ने 20 से ज्यादा पक्षियों के अप्रवास के दौरान उनकी दिनचर्या को जानने के लिए मंगोलियन कुकू प्रोजेक्ट शुरू किया है।
जिसमें कोयल प्रजाति ( Cuckoo Species ) के पांच अलग-अलग पक्षियों ( Birds ) के कंधों पर सैटेलाइट टैग ( Satellite Tag ) लगाकर छोड़ा गया है। इस अनोखे प्रोजेक्ट में इंडोनेशिया ( Indonesia ), मलेशिया ( Malaysia ), अफ्रीका ( Africa ), ऑस्ट्रेलिया ( Australia ), भारत ( India ), न्यूजीलैंड ( New Zealand ) भी सहयोगी हैं।
सैटेलाइट टैग से मिलने वाले सिग्नल से वेबसाइट पर पक्षियों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है। यह टैग दिन में सिर्फ एक बार ब्लिंक करता है। टैग में मिनी सोलर पैनल और सैटेलाइट डाटा मौजूद रहता है। इससे पता चलता है कि यह पक्षी इस समय कहां पर है।