अजब गजब

आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए करें इसका उपयोग,होने लगेगी सोने की बारिश, खुद इस महात्मा ने कर दिखाया था ऐसा

शास्त्रों में माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने और धन प्राप्ति के कई सारे उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में से एक है कनकधारा स्त्रोत।
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Aug 13, 2018
Read Kanakdhara source to o remove poverty
आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए करें इसका उपयोग,होने लगेगी सोने की बारिश, खुद इस महात्मा ने कर दिखाया था ऐसा

नई दिल्ली। पैसे से रिश्ते, प्यार, भावनाएं तो खरीदे नहीं जा सकते, लेकिन इन सबके अलावा पैसा इंसान को कुछ भी दिला सकता है। समाज में ऊंचे दर्जे से लेकर ऐशो-आराम की जिंदगी सब कुछ पैसे से खरीदा जा सकता है। भले ही सुनने में यह बात खराब लगे, लेकिन आजकल लोग भी उसी इंसान को तवज्जो देते हैं जिनके पास पैसा होता है।

निर्धन या गरीब तबके के लोग शुरू से लेकर अभी तक दबते आ रहे हैं। उन्हें अपनी सही बात भी मनवाने के लिए काफी प्रयास करना पड़ता है। निर्धन व्यक्ति चाहकर भी अपने जीवन की परेशानियों से मुक्ति नहीं पा सकता है। अब करें तो क्या करें?

हमारे शास्त्रों में धन की देवी माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने और धन प्राप्ति के कई सारे उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में से एक है कनकधारा स्त्रोत। पुराणों में कहा गया है कि जो भी व्यक्ति कनकधारा स्त्रोत का पाठ विधि-विधान से करता है, उससे लक्ष्मी माता प्रसन्न हो जाती हैं।

आदि शंकराचार्य ने इसकी रचना की थी। इसी की मदद से उन्होंने सोने की बारिश करवाई थी। इस घटना के बाद से धन प्राप्ति के लिए कनकधारा का पाठ किया जाता है। हालांकि इसके पाठ करने के कुछ नियम हैं।

सबसे पहले एक कनकधारा यंत्र और कनकधारा स्त्रोत घर पर लेकर आए। हर रोज कनकधारा यंत्र के सामने धूप-बत्ती जलाकर कनकधारा स्त्रोत का पाठ करें। इसका पाठ आप अपनी सुविधानुसार सुबह या शाम किसी भी समय कर सकते हैं।

पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि एक बार आदि शंकराचार्य भोजन की तलाश में भटक रहे थे। भिक्षा मांगने के लिए वह एक गरीब ब्राह्मण के घर गए, लेकिन उस ब्राह्मण के पास शंकराचार्य को देने के लिए कुछ नहीं था। वह उन्हें खाली हाथ नहीं लौटाना चाहता था।

अत: भिक्षा के रूप में उन्होंने शंकराचार्य को एक सूखा आंवला दे दिया। ब्राह्मण के व्यवहार से प्रसन्न होकर शंकराचार्य ने माता लक्ष्मी से उसकी दरिद्रता को दूर करने की प्रार्थना की।

इसके कुछ समय बाद ब्राह्मण के घर में सोने के आंवले की बारिश होने लगी।उसी दिन से आदि शंकराचार्य की यह प्रार्थना कनकधारा स्त्रोत के नाम से मशहूर हो गई।

Published on:
13 Aug 2018 05:27 pm
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