वाराणसी के भेलूपुर में बुधवार को एक घर में महिला की करीब 5 महीने पुरानी डेडबॉडी मिली।
नई दिल्ली: पैसा एक ऐसी जरूरत है, जिसके लिए इंसान कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है फिर चाहें वो किसी को मौत के नींद सुलाना हो या मुर्दे को जिंदा रखना हो। बात और भी गंभीर हो जाती है, जब बात किसी एक बेटे और मां से जुड़ी हो। जी हां, उत्तर प्रदेश के वाराणसी से कुछ ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है।
वाराणसी के भेलूपुर में बुधवार को एक घर में महिला की करीब 5 महीने पुरानी डेडबॉडी मिली। महिला को हर महीने करीब 18 हजार रुपए पेंशन मिलती थी। पुलिस के अनुसार 5 महीने तक बॉडी को कैसे रखा गया इसकी जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। आज डायल 100 पर एक कॉल आई थी, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई है।
जानकारी के मुताबिक, अमरावती देवी अपने बेटे रवि प्रकाश, देव प्रकाश और योगेश्वर के साथ रहती थीं। उनके पति दयाशंकर कस्टम डिपार्टमेंट में सुपरिटेंडेंट के पद पर थे। उनके 5 बेटे और एक बेटी हैं।
पड़ोसियों ने रवि प्रकाश के घर से बदबू आने पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस जब घर पहुंची तो घर के अंदर बेड पर एक कंकाल मिला। पड़ोसियों की मानें तो रवि प्रकाश अपनी मां के मौत के बाद उसकी डेडबॉडी को कमरे में छुपाकर रखा हुआ था और हर महीने मां को मिलने वाली पेंशन ले रहा था।
बेटे देव प्रकाश का कहना है कि 3 जनवरी 2018 को उनकी मां की मौत हो गई थी। उन्हें घर पर लाए और अंतिम संस्कार के लिए तैयारियां शुरू की। नहलाते समय किसी ने देखा की उनकी धड़कन चल रही है। इसके बाद हमने पंडितों से बात की तो उन्होंने अंतिम संस्कार करने से मना करते हुए कहा कि जब तक शरीर में प्राण है अंतिम संस्कार करना पाप होगा। अभी उनकी सेवा करो।
इसके बाद एक वैध को दिखाया तो उन्होंने शरीर पर लगाने के लिए लेप दिया। इसे ही हम अपनी मां को लगाते हैं। देव प्रकाश का कहना है कि हमने जब डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने भी कहा कि मां कोमा में है। उनकी दावा में हर महीने 8 हजार रूपए खर्च होते हैं। पुलिस का कहना है कि अमरावती देवी की मौत 13 जनवरी को हुई थी। उनकी पेंशन करीब 18 हजार रुपए के आसपास थी। मामले की जांच की जा रही है।