
India US Trade Deal: ब्रिक्स सम्मेलन की चुभन अब टैरिफ टेरर के रूप में सामने आ रही है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार देर रात भारत और चीन समेत दस देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने के लिए लाए गए 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026' विधेयक पर होने वाला मतदान टाल दिया। सीनेट से पहले ही पास हो चुके इस बिल पर बहस के दौरान डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने राष्ट्रपति ट्रंप को व्यापक टैरिफ अधिकार देने पर आपत्ति जताई।
बहस के बाद ध्वनि मत हुआ, लेकिन मीक्स ने औपचारिक मतदान की मांग कर दी, जिसके बाद जॉनसन ने मतदान लंबित रहते प्रतिनिधि सभा की आगे की कार्यवाही स्थगित कर दी। प्रतिनिधि सभा से अंतिम मंजूरी और राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद यह बिल कानून बन जाएगा।
यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि भारत-अमेरिका का वस्तु व्यापार पहले ही करीब 149.2 अरब डॉलर का है। अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार 2025 में अमेरिका ने भारत से 92.28 अरब डॉलर का माल आयात किया, जबकि भारत को 50.27 अरब डॉलर का माल निर्यात किया। यानी अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी मुख्यत: निर्यात के रूप में है।
फरवरी 2026 में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर पारस्परिक टैरिफ 25% से घटाकर 18% करने की घोषणा की थी। इसके उलट प्रस्तावित 100% शुल्क सामान्य व्यापार शुल्क नहीं, बल्कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाने के लिए दंडात्मक कदम है, जिससे भारत के लिए यह मामला व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा खरीद और विदेश नीति का भी बन जाएगा।
100% टैरिफ लागू होने से कपड़े, आईटी/सॉफ्टवेयर सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स, आभूषण और ऑटो पार्ट्स जैसे भारतीय सामान अमरीकी बाजार में रातों-रात दोगुने महंगे हो जाएंगे, जिससे निर्यातकों के ऑर्डर घटने और विनिर्माण क्षेत्र में नौकरियां प्रभावित होने का खतरा है। भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें 35% से ज्यादा हिस्सा अकेले रूस से आता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी जरूरत, राष्ट्रीय हित और वैश्विक बाजार की कीमतों को देखकर ही रूस से तेल खरीदता है और यह साझेदारी जारी रहेगी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भी अमरीका-ईरान से संयम बरतने की अपील दोहराई है।