
अमेरिका के मिशिगन राज्य में डेमोक्रेटिक प्रत्याशी अब्दुल एल-सैयद ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। इसके साथ ही वे पहले मुस्लिम सीनेटर भी बन गए है। अब्दुल एल-सैयद ने रिपब्लिकन प्रत्याशी माइक रोजर्स को हराया है। पूर्व सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी रहे एल-सैयद की इस जीत को अमेरिकी राजनीति में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैयद का कड़ा विरोध किया था और उन्हें जिहादी भी कहा था।
बता दें कि इससे पहले अगस्त 2026 में हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में उन्होंने पार्टी की प्रतिष्ठित उम्मीदवार और कांग्रेस सदस्य हेली स्टीवंस को कड़े मुकाबले में हराया था। इसके बाद मुख्य चुनाव में उनका मुकाबला पूर्व कांग्रेस सदस्य माइक रोजर्स से हुआ।
अब्दुल एल-सैयद ने डॉक्टर बनने के लिए पढ़ाई की, लेकिन बाद में उन्हें महसूस हुआ कि देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसी सोच ने उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासन के क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित किया।
वे वेन काउंटी के स्वास्थ्य, मानव एवं वेटरन्स सेवा विभाग के निदेशक के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनके चुनाव अभियान का मुख्य संदेश था कि स्वास्थ्य सेवाएं हर नागरिक का अधिकार होनी चाहिए और सरकार को अमीर उद्योगपतियों तथा बड़े कॉरपोरेट घरानों के बजाय आम लोगों के लिए काम करना चाहिए।
अपने चुनावी अभियान के दौरान अब्दुल एल-सैयद ने कहा था कि मेरा मानना है कि अमेरिका में जिंदगी इतनी मुश्किल नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे ऐसी सरकार के लिए लड़ेंगे, जो आम नागरिकों के हितों को प्राथमिकता दे, न कि एलन मस्क, डोनाल्ड ट्रंप या उनके अरबपति मित्रों के हितों को।
चुनाव प्रचार के दौरान इजरायल को अमेरिकी समर्थन देने के मुद्दे पर भी तीखी बहस हुई। इजरायल की नीतियों के मुखर आलोचक एल-सैयद को मार्च में मिशिगन के एक सिनेगॉग (यहूदी प्रार्थना स्थल) पर हुए हमले के बाद उनकी प्रतिक्रिया को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था। बाद में उन्होंने उन लोगों से माफी मांगी भी थी।
रिपब्लिकन प्रत्याशी माइक रोजर्स के लिए यह लगातार दूसरा झटका है। इससे पहले 2024 के सीनेट चुनाव में उन्हें डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एलिसा स्लॉटकिन से भी हार का सामना करना पड़ा था।
हालांकि इस बार रोजर्स के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चुनाव प्रचार किया था। लेकिन तब भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि मिशिगन ने 1994 के बाद से किसी रिपब्लिकन उम्मीदवार को अमेरिकी सीनेट में नहीं भेजा था।
अब्दुल एल-सैयद का भारत के कर्नाटक के तटीय क्षेत्र से भी खासा रिश्ता है। उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू का परिवार कर्नाटक के भटकल से जुड़ा हुआ है। भटकल, मंगलुरु से करीब 140 किलोमीटर दूर स्थित है।
सारा जुकाकू पेशे से मनोचिकित्सक (साइकियाट्रिस्ट) हैं। उनके दादा जुकाकू शम्सुद्दीन मैसूर राज्य में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीडी जत्ती के कार्यकाल में वित्त विभाग में उपमंत्री रह चुके थे।
सारा के परिवार की जड़ें भटकल में हैं, हालांकि परिवार के अधिकांश सदस्य अब बेंगलुरु में रहते हैं। सारा का निकटतम परिवार लंबे समय से अमेरिका में रह रहा है।