अमेरिका ने परमाणु माइक्रोरिएक्टर को एयरलिफ्ट करते हुए इतिहास रच दिया है। क्या होगा इससे फायदा? आइए नज़र डालते हैं।
ऊर्जा के क्षेत्र में अमेरिका ने एक ऐसी छलांग लगाई है, जो भविष्य के युद्धक्षेत्र, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन की तस्वीर बदल सकता है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग और रक्षा विभाग ने मिलकर पहली बार एक परमाणु माइक्रो-रिएक्टर को मालवाहक विमान के ज़रिए एयरलिफ्ट कर इतिहास रच दिया। 'ऑपरेशन विंडलॉर्ड' के नाम से जानी जाने वाली इस ऐतिहासिक कवायद में एक कॉम्पैक्ट परमाणु रिएक्टर को कैलिफोर्निया के मार्च एयर रिज़र्व बेस से उड़ाकर यूटा के हिल एयर फोर्स बेस तक सफलतापूर्वक पहुंचाया गया।
अभी तक परमाणु रिएक्टरों को भारी-भरकम और स्थिर ढांचे के रूप में देखा जाता था, लेकिन इस सफल परीक्षण ने साबित कर दिया कि अब परमाणु ऊर्जा को ज़रूरत पड़ने पर किसी भी दूरस्थ स्थान या युद्धक्षेत्र में तैनात किया जा सकता है। ऐसा करते हुए अमेरिका ने इतिहास रच दिया है।
कैलिफोर्निया स्थित वैलर एटॉमिक्स द्वारा निर्मित 'वार्ड माइक्रो-रिएक्टर' आकार में एक मिनीवैन से थोड़ा बड़ा है। परीक्षण के दौरान इसे बिना न्यूक्लियर फ्यूल के सी-17 ग्लोबमास्टर विमान में लोड किया गया था। वैलर एटॉमिक्स के सीईओ यशायाह टेलर के अनुसार, यह छोटा सा दिखने वाला यंत्र अपनी पूरी क्षमता पर 5 मेगावॉट तक बिजली पैदा कर सकता है, जो लगभग 5,000 घरों को रोशन करने के लिए पर्याप्त है। इसकी मदद से कहीं भी बिजली पैदा की जा सकेगी।