
NASA astronaut on moon
अंतरिक्ष की दुनिया में 2026 एक ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति का गवाह बनने जा रहा है। नासा ने अंततः अपनी दशकों पुरानी 'हार्डवेयर नीति' को बदलते हुए कमर्शियल स्मार्टफोन्स को अंतरिक्ष यात्रा के लिए 'ग्रीन सिग्नल' दे दिया है। करीब 54 साल बाद चंद्रमा की परिक्रमा करने जा रहे आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्री और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन मिशन का आगामी क्रू-12 मिशन अब अपने साथ भारी-भरकम निकोन डीएसएलआरनहीं, बल्कि जेब में आने वाले आधुनिक आईफोन ले जाएंगे।
अब तक अंतरिक्ष यात्री 2016 के पुराने कैमरों और दशक पुराने गो-प्रो पर निर्भर थे। नासा प्रशासक जेरेड आइजकमैन ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव सिर्फ बेहतर फोटो के लिए नहीं, बल्कि पृथ्वी से करीब 2.5 लाख मील (4,02,336 किलोमीटर) दूर 'ऑपरेशनल अर्जेंसी' के लिए है। स्मार्टफोन से ली गई तस्वीरें और 4K वीडियो सीधे एजेंसी, दुनिया और परिवार के साथ शेयर करना आसान होगा।
दुनिया भर के लोग अब उन 'लूनर सेल्फी' का इंतज़ार कर रहे हैं जो इतिहास में पहली बार किसी स्मार्टफोन से ली जाएंगी। हालांकि इस तकनीक को मंजूरी मिल गई है, लेकिन आर्टेमिस II मिशन की लॉन्चिंग में थोड़ी देरी हुई है। हालिया तकनीकी जांच के बाद अब मार्च 2026 की नई तारीख पर काम चल रहा है।
रेडिएशन टेस्टिंग - अंतरिक्ष की घातक किरणें फोन के सेंसर को खराब तो नहीं करेगी।
थर्मल चेक - अत्यधिक तापमान (बहुत गर्म या ठंडा) में बैटरी ब्लास्ट तो नहीं हो जाएगी।
वाइब्रेशन टेस्ट - रॉकेट लॉन्च के जबरदस्त झटकों को स्मार्टफोन झेल पाएगा या नहीं।
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Updated on:
21 Feb 2026 06:10 am
Published on:
21 Feb 2026 06:09 am
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