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दुनियाभर में डेटा सेंटर-ईवी से बढ़ रही बिजली की मांग, अगले पांच साल में 3.6% की दर से होगा इजाफा

दुनियाभर में बिजली की मांग बढ़ रही है। क्या है इसकी वजह और आने वाले समय में इसमें कितना इजाफा होगा? आइए जानते हैं।

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भारत

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Tanay Mishra

Feb 21, 2026

Energy demand growing

Energy demand growing (Representational Photo)

दुनियाभर में लगातार बढ़ रहे डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल्स के बढ़ते इस्तेमाल के चलते बिजली की मांग में अप्रत्याशित तेज़ी आ रही है। एक अनुमान के अनुसार अगले 5 साल में दुनिया में बिजली की मांग 3.6% की दर से बढ़ेगी जो पिछले दशक के औसत से 50% ज़्यादा है। वहीं बिजली का इस्तेमाल कुल ऊर्जा मांग की तुलना में कम से कम ढाई गुना तेज़ी से बढ़ेगा। भारत की बिजली की मांग 2030 तक 6.4% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो विश्व भर में सबसे ज़्यादा है।

एडवांस इकोनॉमी में ज़्यादा डिमांड

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) की सालाना रिपोर्ट इलेक्ट्रिसिटी 2026 के अनुसार वैश्विक बिजली मांग में हर साल लगभग 1,100 टेरावाट-घंटे (टीडब्ल्यूएच) की बढ़ोतरी होगी और 2030 तक दुनिया में बिजली की खपत 33,600 टीडब्ल्यूएच पहुंच सकती है। गौरतलब है कि यह 2025 में 28,200 टीडब्ल्यूएच थी। सबसे ज़्यादा चीन में 2030 तक लगभग 2,600 टीडब्ल्यूएच बिजली की मांग का अनुमान है। एडवांस इकोनॉमी में बिजली की डिमांड लगभग 15 साल की स्थिरता के बाद फिर से बढ़ रही है, जिसका कारण डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, हीट पंप और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में वैश्विक बिजली मांग बढ़ोतरी में एडवांस्ड इकोनॉमी का हिस्सा लगभग 20% था और इसके आगे भी इतना ही बने रहने की उम्मीद है।

भारत में एयरकंडिशनिंग से 20% से ज्यादा खपत

कूलिंग इंडस्ट्री, एग्रीकल्चर और परिवहन के साधनों के इलेक्ट्रिफिकेशन के कारण भारत की मांग 2030 तक सालाना औसतन 6.4% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो दुनिया भर में सबसे तेज़ है। गौरतलब है कि लगातार चार सालों तक 6% से ज़्यादा की बढ़त के बाद 2025 में भारत की बिजली की मांग में बढ़ोतरी तुलनात्मक रूप से कम रही थी, जिसका मुख्य कारण शुरुआती मानसून के बाद तापमान में नरमी थी, जिससे एयर-कंडीशनिंग का इस्तेमाल और एग्रीकल्चर पंपिंग कम हो गई। हालांकि अगले 5 सालों में भारत की सालाना बिजली की खपत में 570 टीडब्ल्यूएच से ज्यादा की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसमें उद्योगों का हिस्सा एक तिहाई रहेगा। बढ़ी हुई कुल मांग में एयर कंडीशनिंग का योगदान 20% से ज़्यादा हो सकता है। कृषि और परिवहन का इलेक्ट्रिफिकेशन भी प्रमुख कारण रहेगा। गौरतलब है कि भारत में 2017 से राष्ट्रीय पीक डिमांड में 54% की बढ़ोतरी हुई है, जो 2024 में लगभग 250 गीगावाट तक पहुंच गई।