Lies: डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में '10 महीने में 8 जंग' समेत कई भ्रामक दावे किए, जिनकी अमेरिकी मीडिया ने पोल खोल दी है।
US Media : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर निशाने पर आ गए हैं। अपने एक हालिया संबोधन के दौरान ट्रंप ने दुनिया भर में चल रहे युद्धों, अमेरिकी अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को लेकर कई ऐसे चौंकाने वाले दावे किए, जिन्होंने सुर्खियां बटोर लीं। लेकिन, जब अमेरिकी मीडिया और प्रमुख फैक्ट-चेकर्स (Donald Trump fact check) ने उनके इस बहुचर्चित भाषण की गहराई से पड़ताल की, तो एक ही झटके में उनके 5 बड़े झूठ पकड़े गए। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा '10 महीने में 8 जंग' वाले दावे की हो रही है, जिसे अमेरिकी मीडिया ने पूरी तरह से भ्रामक और मनगढ़ंत करार दिया है। आइए समझते हैं कि ट्रंप (Trump speech lies) ने क्या कहा और इसके पीछे की हकीकत क्या है।
अमेरिकी मीडिया रिपोटर्स के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए मौजूदा अमेरिकी प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 महीनों के अंदर दुनिया में 8 नए युद्ध शुरू हो गए हैं, और इसके लिए सीधे तौर पर वर्तमान सरकार की 'कमजोर नीतियां' जिम्मेदार हैं। हालांकि, जब प्रमुख समाचार एजेंसियों ने इस दावे के 'फैक्ट-चेक' किए तो यह सिरे से झूठे साबित हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सच है कि इस वक्त दुनिया के कुछ हिस्सों (जैसे मिडिल ईस्ट या यूरोप) में भारी तनाव है, लेकिन पिछले 10 महीनों में "8 नए युद्ध" शुरू होने का कोई भी आधिकारिक, कूटनीतिक या जमीनी आंकड़ा मौजूद नहीं है। जानकारों के मुताबिक, ट्रंप का यह दावा केवल राजनीतिक फायदा उठाने और जनता के बीच खौफ का नैरेटिव सेट करने की एक सोची-समझी कोशिश मात्र है।
ट्रंप के भाषण में सिर्फ युद्ध वाली बात ही गलत नहीं थी, बल्कि मीडिया ने उनके 4 अन्य दावों की भी पोल खोली। उन्होंने सीना ठोक कर कहा कि उनके कार्यकाल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था इतिहास में सबसे मजबूत थी। जबकि वास्तविक आर्थिक डेटा बताता है कि उनके समय में विकास दर औसत ही थी और कई अन्य राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में इससे बेहतर आंकड़े दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने अमेरिका के बॉर्डर पूरी तरह से "खोल" दिए हैं। यह तथ्यात्मक रूप से गलत है, क्योंकि बॉर्डर पेट्रोलिंग, गिरफ्तारियां और अवैध प्रवासियों का डिपोर्टेशन आज भी सख्ती से जारी है।
ट्रंप ने एक बार फिर अपने पुराने और निराधार 'चुनाव चोरी' के आरोपों को दोहराया। ध्यान रहे कि इन दावों को अमेरिकी अदालतें और चुनाव आयोग कई बार सबूतों के अभाव में खारिज कर चुके हैं।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका दूसरे देशों को अपनी तिजोरी खोल कर मुफ्त में अंधाधुंध पैसा बांट रहा है। सच्चाई यह है कि इस विदेशी फंड का एक बहुत बड़ा हिस्सा कड़े नियम-शर्तों, सैन्य संधियों या भारी कर्ज के रूप में दिया जाता है।
ट्रंप के इस भाषण और मीडिया के 'फैक्ट-चेक' के बाद अमेरिकी राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी नेताओं और डेमोक्रेट्स का कहना है कि ट्रंप हमेशा की तरह तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं ताकि वोटरों को भ्रमित किया जा सके। वहीं दूसरी ओर, ट्रंप के कट्टर समर्थकों और उनकी पीआर टीम ने मुख्यधारा की मीडिया पर 'पक्षपाती' होने का आरोप लगाया है। उनका तर्क है कि ट्रंप जो कह रहे हैं, वह आम अमेरिकी नागरिक की असुरक्षा की भावना है, जिसे 'लेफ्ट-विंग' मीडिया जानबूझकर दबाने की कोशिश कर रहा है।
इस बड़े खुलासे के बाद कई स्वतंत्र फैक्ट-चेकिंग संस्थाएं अलर्ट हो गई हैं और ट्रंप के पिछले कुछ महीनों के सभी चुनावी भाषणों का दोबारा फ्रेम-दर-फ्रेम विश्लेषण कर रही हैं। अब यह भी देखा जा रहा है कि एक्स (X) और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इन भ्रामक दावों वाले भाषण के वीडियो पर 'चेतावनी' (Warning Label) लगाते हैं या नहीं। आने वाले दिनों में ट्रंप के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की पूरी संभावना है।