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जंग के बीच मिला भरोसा, म्यांमार में फिर शुरू होंगे भारत के रुके हुए प्रोजेक्ट्स

Diplomacy: म्यांमार में जारी गृह युद्ध के कारण रुके हुए भारत के प्रमुख कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स जल्द ही फिर से शुरू होने वाले हैं। म्यांमार सरकार ने भारत को आधिकारिक भरोसा दिलाया है कि वह इन रणनीतिक और व्यापारिक परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी लाएगी।

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भारत

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MI Zahir

Jun 01, 2026

Myanmar assures India to push connectivity projects

विदेश सचिव विक्रम मिस्री। ( फोटो : ANI)

Hostilities: म्यांमार में चल रहे भारी संघर्ष और के बीच भारत के लिए एक बहुत ही सकारात्मक और राहत भरी खबर आई है। म्यांमार सरकार ने भारत को कूटनीतिक स्तर पर यह पुख्ता आश्वासन दिया है कि दोनों देशों के बीच चल रहे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को अब तेजी से पूरा किया जाएगा। ध्यान रहे कि म्यांमार के अंदर सेना और विद्रोही गुटों के बीच जारी हिंसक टकराव के कारण पिछले काफी समय से इन निर्माण कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग गई थी। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया है कि म्यांमार ने द्विपक्षीय विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने और इन अटके हुए मेगा प्रोजेक्ट्स को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की प्रतिबद्धता जताई है। यह कदम पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

भारत के रक्षा और विदेश मामलों के जानकारों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी

म्यांमार के इस कूटनीतिक आश्वासन पर भारत के रक्षा और विदेश मामलों के जानकारों ने बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि म्यांमार का यह रुख भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के लिए एक नई संजीवनी की तरह है। पूर्व भारतीय राजनयिकों का कहना है कि चीन के इस क्षेत्र में लगातार बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, कलादान जैसे प्रोजेक्ट्स का पूरा होना भारत की सामरिक सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। वहीं, सीमावर्ती राज्यों, विशेषकर मिजोरम और मणिपुर के व्यापारिक संगठनों चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने भी इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। उनका मानना है कि इन रास्तों के खुलने से पूर्वोत्तर भारत में रोजगार और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापार के नए और सुरक्षित रास्ते खुलेंगे।

'भारत-म्यांमार-थाईलैंड राजमार्ग' के अटके हुए हिस्सों पर विशेष चर्चा

विदेश मंत्रालय के अनुसार म्यांमार के वरिष्ठ नेतृत्व और भारतीय अधिकारियों के बीच हाल ही में एक उच्च स्तरीय वार्ता हुई है। इस दौरान मुख्य रूप से 'कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट' और 'भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग' के अटके हुए हिस्सों पर विशेष चर्चा की गई।

एक समन्वय समिति बनाने पर विचार

अब दोनों देश सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए एक समन्वय समिति बनाने पर विचार कर रहे हैं। यह समिति जमीनी स्तर पर सुरक्षा की समीक्षा करेगी और निर्माण कार्य में लगे ठेकेदारों व मजदूरों को एक सुरक्षित माहौल देने की रणनीति बनाएगी, ताकि बिना किसी नई बाधा के काम दुबारा शुरू हो सकें।

कूटनीतिक कवायद का एक पहलू चीन की विस्तारवादी नीति से भी जुड़ा हुआ

इस पूरी कूटनीतिक कवायद का एक महत्वपूर्ण पहलू चीन की विस्तारवादी नीति से भी जुड़ा हुआ है। चीन लगातार म्यांमार में अपने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स मसलन चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा को तेजी से पूरा कर रहा है। ऐसे में भारत के रणनीतिक प्रोजेक्ट्स में देरी होना, नई दिल्ली के लिए सामरिक रूप से नुकसानदेह हो सकता था। म्यांमार का यह नया आश्वासन न केवल चीन के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह म्यांमार की सैन्य सरकार द्वारा भारत जैसे मजबूत पड़ोसी के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने की कूटनीतिक समझ भी दर्शाता है। (इनपुट: ANI)