
इज़रायल (Israel) और ईरान (Iran) के बीच तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कुछ दिन पहले ईरान ने इज़रायल पर 180 से ज़्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। ईरान का निशाना इज़रायल के सैन्य ठिकाने थे। हालांकि इज़रायल ने ईरान की ज़्यादातर मिसाइलों को ध्वस्त कर दिया था, लेकिन इज़रायल ने इस हमले को नज़रअंदाज़ नहीं किया। इज़रायल यह साफ कर चुका है कि वो ईरान के हमले का जवाब देने की तैयारी कर रहा है और इज़रायल का जवाब घातक और सटीक होगा। ईरान ने पहले ही कह दिया है कि अगर इज़रायल उस पर हमला करता है, तो ईरान भी जवाबी हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। इसी बीच अमेरिका (United States Of America), जो शुरू से इज़रायल का समर्थक रहा है, ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा फैसला लिया है।
अमेरिका ने ईरान पर लगाए प्रतिबंध
ईरान ने इज़रायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया था। इसी बात के मद्देनज़र अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा व्यापार को टारगेट करते हुए प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका ने ईरान के पेट्रोलियम व्यापार की 6 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं और साथ ही 6 ईरानी जहाजों को प्रतिबंधित संपत्ति घोषित कर दिया है। इतना ही नहीं, अमेरिका ने यह भी कहा कि वो ईरानी अर्थव्यवस्था के पेट्रोलियम या पेट्रोकेमिकल सेक्टर्स में काम करने के लिए निर्धारित हर व्यक्ति के खिलाफ प्रतिबंध लगाएगा। इसके अलावा अमेरिका 10 अन्य संस्थाओं को भी प्रतिबंधित कर रही है और अमेरिका नामित संस्थाओं नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी या ट्रिलियंस पेट्रोकेमिकल कंपनी लिमिटेड के समर्थन में ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की शिपमेंट में शामिल 17 जहाजों की पहचान भी प्रतिबंधित संपत्ति के रूप में कर रही है।
ईरान के मिसाइल प्रोग्राम्स और आतंकियों को समर्थन में आएगी कमज़ोरी
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन (Jake Sullivan) ने बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका के प्रतिबंध ईरान को उसके मिसाइल प्रोग्राम्स में काम लेने और अमेरिका, उसके सहयोगियों और भागीदारों को धमकी देने वाले आतंकी समूहों को समर्थन देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वित्तीय संसाधनों से वंचित करने में मदद मिलेगी। सुलिवन के अनुसार इससे ईरान के मिसाइल प्रोग्राम्स और आतंकियों को देने वाले समर्थन में कमज़ोरी आएगी।
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